Prakhar Pragyanand
“बुद्ध कहते हैं कि अपना प्रकाश स्वयं बनो, दूसरों के दीपक से काम नहीं चलेगा।”
― Ashtavakra Geeta
― Ashtavakra Geeta
“अज्ञानी शरीरों को देखता है, पदार्थों को देखता है, इसलिए उसे भिन्नताएँ दिखाई देती हैं; किंतु ज्ञानी इस संपूर्ण सृष्टि के मूल तत्त्व ब्रह्म को, आत्मा को देखता है-जिससे इस सृष्टि का अस्तित्व है-इसलिए उसे इस संपूर्ण सृष्टि में एकता दिखाई देती है।”
― Ashtavakra Geeta
― Ashtavakra Geeta
“जहाँ बुद्धि की सीमा समाप्त होती है, वहीं चेतन का अनुभव होता है। बुद्धि का अनुभव क्षुद्र का ही अनुभव है। उसका अनुभव संसार तक ही सीमित है,”
― Ashtavakra Geeta
― Ashtavakra Geeta
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