जनाब इतिहास गवाह है के केला से हम ठुक के उसे रौंदा नहीं, बस कुछ इधर उधर खाने की आदत बचपन से है, आखिर महावीर हैं कांदा नहीं; इतनी इज़्ज़त खाने को देने वाले का क़ुतुब मीनार गिरा हुआ होता है तो पढ़ा ही होगा, जग के बीज से आपको प्रेम पत्र लिख रहे हैं, आखिर जग पे तो जग आज चढ़ा ही होगा।
Published on December 04, 2021 18:23