Jump to ratings and reviews
Rate this book

आग और पानी

Rate this book
बनारस. दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता. संसार की सबसे ज़िंदा और रौशन जगहों में-से एक. जिसके ज़र्रे-ज़र्रे में कोई न कोई बात है; जिसके बारीक तार अतीत से होकर भविष्य तक जाते हैं. व्योमेश शुक्ल की यह किताब बनारस को उसके सबसे गाढ़े और मनोहर रंगों में पहचानती है. यों, इस किताब का वास्ता उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ की शहनाई और पंडित किशन महाराज के तबले से बराबर पड़ता है. बनारस का गाना-बजाना, यहाँ के नायक, इस अनूठे शहर की आदतें और यहाँ की गंगा सब इस किताब में साथ-साथ, दोस्तों की तरह मौजूद हैं. यह किताब अपने आत्मीय और सम्मोहक गद्य के साथ-साथ इस बात के लिये भी पढ़ी और साथ रखी जानी चाहिये कि यह सदियों के आर-पार फैली हुई उत्थान और पतन की नगर-गाथा को खिलाड़ियों और लोकगायकों के शिल्प में हमसे कहती है, लेकिन तासीर उसमें इतिहास की-सी है.

124 pages, Paperback

Published January 1, 2023

12 people are currently reading
118 people want to read

About the author

Vyomesh Shukla

8 books9 followers
25 जून, 1980; वाराणसी में जन्म। यहीं बचपन और एम.ए. तक पढ़ाई। शहर के जीवन, अतीत, भूगोल और दिक़्क़तों पर एकाग्र निबन्धों और प्रतिक्रियाओं के साथ लिखने की शुरुआत। व्योमेश ने इराक़ पर हुई अमेरिकी ज़्यादतियों के बारे में मशहूर अमेरिकी पत्रकार इलियट वाइनबर्गर की किताब व्हाट आई हर्ड अबाउट ईराक़ का हिन्दी अनुवाद किया, जिसे हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका पहल ने

एक पुस्तिका के तौर पर प्रकाशित किया है। व्योमेश ने विश्व-साहित्य से नॉम चोमस्की, हार्वर्ड ज़िन, रेमंड विलियम्स, टेरी इगल्टन, एडवर्ड सईद और भारतीय वाङ्मय से महाश्वेता देवी और के. सच्चिदानंदन के लेखन का भी अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया है।

व्योमेश शुक्ल का पहला कविता-संग्रह 2009 में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ, जिसका नाम है ‘फिर भी कुछ लोग’। कविताओं के लिए 2008 में ‘अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार’ और 2009 में ‘भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार’। आलोचनात्मक लेखन के लिए 2011 में ‘रज़ा फाउंडेशन फ़ेलोशिप’ और संस्कृति-कर्म के लिए भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का ‘जनकल्याण सम्मान’ मिला है। नाटकों के निर्देशन के लिए इन्हें संगीत नाटक अकादेमी का ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार’ दिया गया है।

व्योमेश की कविताओं के अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ-साथ कुछ विदेशी भाषाओं में हुए हैं। अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपने एक सर्वेक्षण में इन्हें देश के दस श्रेष्ठ लेखकों में शामिल किया है तो हिन्दी साप्ताहिक इंडिया टुडे ने भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक दृश्यालेख में परिवर्तन करनेवाली पैंतीस शख़्सियतों में जगह दी है।

लेखन के साथ-साथ व्योमेश बनारस में रहकर रूपवाणी नामक एक रंगसमूह का संचालन करते हैं।

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
19 (70%)
4 stars
5 (18%)
3 stars
2 (7%)
2 stars
0 (0%)
1 star
1 (3%)
Displaying 1 - 6 of 6 reviews
Profile Image for Mohit.
Author 2 books101 followers
February 5, 2023
वाराणसी के अस्सी घाट के ठीक सामने है Harmony The Book Shop, जिसके सर्वे सर्वा राकेश जी ने मेरे वाराणसी के बारे में किताब माँगने पर ये अंक आगे कर दिया। बोले, पढ़ के देखिए, ईमानदार है, अभी आयी है।

Am so thankful to him for this because this book was all that I needed to end my Kashi trip on a familiar note.

This is an incredible piece of work because of the language but also because of inherent honesty. This book, unlike almost all contemporary books, is neither left nor right. It is and has it’s heart at the center and that matters a lot to someone like me. It is easy to read but not in a चलताऊ language, which makes it very enlightening. Through stories & interviews (of those possible), Vyomesh ji takes us through the bylanes of Kashi and lives of Tulsidas, Kabir, Prasad, Ustaad Bilmillah Khan, Pandit Kishan Maharaj, Premchand, Bhartendu Harishchand and so many more stars from this constellation that has given countless gems to India and world.

Strong recommended and happy to gift it to whoever is keen to read :)
Profile Image for Alhad Raje.
12 reviews
April 24, 2023
Essential reading on the concept & culture of Benaras.
This ancient city serves as the timeline map of Indian civilisation, which the author has successfully rendered with brief character sketches, stories & anecdotes.
The writing style is simple (even for those who are not used to reading Hindi books),yet incredibly beautiful & captivates till the very end.
I’ve decided to plan a visit to Benaras & use this book as a guide to experience the true essence of this city.
Very enriching read & highly recommended.
Profile Image for Mayank Sharma.
3 reviews1 follower
June 8, 2023
बनारस की कला, बनारस की प्रतिभा, बनारस के रीति रिवाज़ों
बनारस के लोगों और बनारस की हस्तियों पर लिखी गई है ये किताब,
कबीर , तुलसीदास से लेकर, बिरजू महाराज, बिस्मिल्ला ख़ाँ तक सबकी जिंदगी के अंश लिख दिये हैं लेखक ने।
बनारस की गली, मंदिरों और गंगा से इन महान हस्तियों का प्रेम भी क्या खूब लिखा है
37 reviews
July 21, 2025
दिव्य की अक्टूबर जंक्शन पढ़ने के बाद, जिसमें बनारस सिर्फ़ एक पृष्ठभूमि नहीं बल्कि एक जीवंत पात्र बनकर सामने आता है, जो न कुछ कहता है, न कुछ छुपाता है, 'आग और पानी' पढ़ना कुछ वैसा ही था जैसे उसी बनारस से फिर मिलना, लेकिन इस बार उसकी गलियों से नहीं, उसकी आत्मा से होकर गुजरना।

कुछ किताबें शहर नहीं होतीं, वे उस शहर की धड़कन होती हैं। 'आग और पानी' ऐसी ही किताब है। इसे पढ़ना, बनारस की गलियों में भटकना नहीं, वहाँ की हवा में ठहर जाना है। यह किताब आपको जानकारी नहीं देती, आपको धीरे-धीरे बनारस का एक हिस्सा बना देती है। जैसे कोई पुराना बनारसी दोस्त हो, जो बातों-बातों में आपको शहर के बाहरी दृश्य नहीं, उसकी भीतरी परतें दिखाता है।

किताब का शीर्षक "आग और पानी" ख़ुद में बनारस का परिचय है। एक तरफ़ जलती हुई लौ है संघर्ष, भक्ति, तपी हुई आत्मा की आँच। दूसरी तरफ़ है बहती हुई गंगा शांति, प्रवाह, और समर्पण की ठंडी साँस। बनारस इन दोनों के बीच टिका हुआ है। एक ऐसा द्वंद्व जो कभी पूरा हल नहीं होता, लेकिन शायद होना भी नहीं चाहिए। क्योंकि बनारस का सौंदर्य इसी टकराहट में है, विलोमों का संतुलन।

शुक्ल तुलसीदास को केवल कवि नहीं, भाषा और विश्वास का योद्धा मानते हैं। राम को संस्कृत की चौखट से निकालकर अवधी की चौपाल में लाना सिर्फ़ साहित्य नहीं, सामाजिक क्रांति थी। शुक्ल बताते हैं कि कैसे रामचरितमानस ने उस समय की सत्ता, ब्राह्मणवाद और भाषा के अहंकार को चुनौती दी, और जनता की भाषा में आस्था का बीज बोया।

किताब की सबसे सुंदर परतें तब खुलती हैं जब संगीत की बात होती है। कबीरचौरा की गलियाँ, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई, पं. किशन महाराज की तबला, और कबीर की आवाज़ इन सबमें बनारस साँस लेता है। लेखक दिखाते हैं कि संगीत, संत और शब्द बनारस के डीएनए में शामिल हैं। यहाँ सुरों से अधिक, संवेदनाएं बजती हैं।

लेकिन यह किताब बनारस की तारीफ़ में अंधी नहीं है। शुक्ल गंगा के प्रदूषण से लेकर धार्मिक पाखंड तक, हर कड़वी सच्चाई को भी उतनी ही सच्चाई से दिखाते हैं। उनकी आलोचना में तंज नहीं, ममत्व है। जैसे कोई अपने घर की दीवार पर जमी धूल को पोछता है, ना शर्माता है, ना छुपाता है, बस चाहता है कि घर साफ़ दिखे।

सबसे बड़ी बात यह कि किताब यह कहने नहीं आती कि बनारस क्या है, बल्कि यह महसूस कराती है कि बनारस क्या-क्या हो सकता है। भौतिकता और अध्यात्म, परंपरा और आधुनिकता, संघर्ष और समर्पण यहाँ सब साथ रहते हैं, और शायद इसीलिए यह शहर इतना ज़िंदा है।

वैसे मुझे भीड़ पसंद नहीं है, करीब-करीब आप एगोराफोबिया कह सकते हैं। फिर भी बनारस ने मुझे हमेशा खींचा है। कुछ साल पहले तक मैं और मेरे कुछ दोस्त हर साल बनारस में मिलते थे गंगा के घाट पर बैठते थे, सुबह के कुहासे में चाय पीते थे, और बिना ज़्यादा बोले बहुत कुछ कह जाते थे। कोविड ने उस परंपरा को तोड़ दिया। लेकिन शायद यही अंतर्विरोध है - भीड़ से दूरी, लेकिन बनारस से मोह। और शायद यही बनारस की सबसे बड़ी खासियत है, वह आपके उलझे हुए हिस्सों को भी जगह देता है।

'आग और पानी' कोई सामान्य किताब नहीं, वह एक ऐसी यात्रा है जो आपको बनारस के रास्तों से होते हुए, ख़ुद अपने भीतर ले जाती है। जहाँ हर विरोधाभास एक नई समझ, और हर द्वंद्व एक नई दिशा देता है।

अगर आपने कभी बनारस को सिर्फ़ एक पर्यटन स्थल समझा है, तो यह किताब पढ़िए, यह शहर की चुप दीवारों और बोलते मोड़ों से आपका परिचय कराएगी। अगर आप संस्कृति, इतिहास, और समाज की परतों को एक साथ पढ़ना चाहते हैं, तो यह किताब आपका इंतज़ार कर रही है। और अगर आप कभी अपने ही अंतर्विरोधों में उलझे हैं, तो 'आग और पानी' आपको दिखाएगी कि उन उलझनों में भी एक अनकहा संतुलन छुपा होता है। यह किताब बनारस को पढ़ने का नहीं, महसूस करने का मौका है।
1 review
February 27, 2023
Iam very excited to know the mystery wrapped in each gaali of Mahadev naagri kashi
Profile Image for Himanshu Rai.
78 reviews57 followers
October 23, 2024
किताबवाला के साप्ताहिक एपिसोड में, सौरभ द्विवेदी ने लेखक व्योमेश शुक्ल से उनकी पुस्तक 'आग और पानी' पर गहन बातचीत की। इसके बाद पुस्तक को पढ़ने का विचार किया है। आख़िरकार, लंबे इंतज़ार के बाद किताब मिल गई और मैंने बनारस के बारे में पढ़ा जिसके ज़र्रे-ज़र्रे में कोई न कोई अद्बभुत बात है।

जब मार्क ट्वेन कहते हैं कि 'बनारस इज़ ओल्डर दैन द हिस्ट्री' यानी ये शहर इतिहास से भी पुराना है तब वाकई लगता है कि बनारस संस्कृति की आदिम लय का शहर है! व्योमेश शुक्ल ने अपनी किताब में बनारस की आत्मा, उसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्त्व को बड़ी खूबसूरती से उकेरा है । 'आग और पानी' में बनारस के जीवन के विरोधाभासों को, जैसे कि भौतिकता और आध्यात्मिकता, संघर्ष और समर्पण, और आधुनिकता और परंपरा, के बीच के संतुलन को बेहद सूक्ष्मता और खूबसूरती से पेश किया है। यह किताब बनारस की गलियों, लोकगायकों का शिल्प, गंगा-जमुनी तहज़ीब और आम जनजीवन से प्रेरित हैं। यदि आप बनारस को जानना और महसूस करना चाहते हैं, तो ये किताब जरूर पढ़ें।
Displaying 1 - 6 of 6 reviews

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.