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Khamoshi: Kuch Kehti Hai

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आमतौर पर हम अपने भावों को दूसरों के समक्ष बोलकर अथवा लिख कर अभिव्यक्त करते हैं। लेकिन कभी-कभी जीवन में कुछ ऐसी परिस्थितियाँ भी घर कर जाती हैं, जब हम बोलने अथवा लिखने की अवस्था में नहीं होते। तब हमारे दिल में एक अजीब सा सन्नाटा पसर जाता है। हमारे शब्द पूर्णतः ख़ामोश हो जाते हैं और हमारे दिल की बातें हमारे दिल तक ही सिमट कर रह जाती हैं। लेकिन इस चुप्पी के बाद भी हमारे चेहरे की ख़ामोशी वो सारी बातें कह जाती है जो हम चाह कर भी किसी से नहीं कह पाते। प्रस्तुत कविता संग्रह ‘ख़ामोशीः कुछ कहती है’ के अंतर्गत 100 कविताओं का संकलन है। इसका यह शीर्षक इसमे लिखी एक कविता ‘ये ख़ामोशी भी कुछ कहती है’ पर आधारित है। ये कवितायें जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपने अंदर समेटे हुए है, जिसका रसास्वादन इन कविताओं को प&

144 pages, Kindle Edition

Published October 6, 2019

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Pawan Kumar Mishra

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