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अम्बपाली एक उत्तरगाथा

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अम्बपाली एक उत्तरगाथा- मनुष्यता के इतिहास के निर्माण में मिथकों की अनिवार्यतः प्रमुख भूमिका रही है, इसके बावजूद यह एक निर्विवादित सत्य है कि अम्बपाली भारत की ही नहीं अपितु सम्भवतः विश्व की पहली स्त्रीवादी नागरिक थी-ठीक वैसे ही जैसे कि उसकी मातृभूमि वैशाली दुनिया का प्राचीनतम गणतन्त्र था। किन्तु यहाँ गौरतलब यह है कि अम्बपाली का नारीवाद अपनी प्रवृत्ति और प्रकृति में अस्तित्ववादी न होकर वैराग्य और आत्ममुक्ति से निःसृत था। सिमोन द'बोउआ ने बीसवीं सदी में जिस सामाजिक सिद्धान्त का ईजाद किया था कि-'केवल पुरुषों के हाथ से सत्ता प्राप्त करना ही अभीष्ट नहीं होना चाहिए, आवश्यकता इस बात की है कि सत्ता की व्यावहारिक परिभाषा में परिवर्तन लाया जाये' -अम्बपाली कोई ढाई हज़ार साल पहले इस निष&

238 pages, Kindle Edition

Published January 20, 2022

2 people want to read

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Geetashree

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Displaying 1 - 2 of 2 reviews
April 19, 2024
आम्रपाली की कथा कई वर्ष पूर्व आचार्य चतुरसेन द्वारा रचित महाकृति "वैशाली की नगरवधू" में पढ़ी थी।

शायद उससे तुलना के कारण मन में अपेक्षा भी अधिक थी पर यह कृति मन को ना भाई। मैंने लगभग ५० पन्नों तक पढ़ा पर मुझे यह उबाऊ लगी। ना इसमें शब्द लालित्य था और ना कहानी के पात्रों और उनकी पृष्ठभूमि को समुचित रूप से उकेरा गया था।

आज से दो हजार वर्ष पूर्व की कथा में "बेखुदी" और "फैसला" जैसे शब्दों का उपयोग भी उचित ना लगा।
52 reviews
January 30, 2024
What a fascinating look at Ambapali and through her issues that impact women even now.
Displaying 1 - 2 of 2 reviews

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