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Ganga Prasad Vimal ki Lokpriya Kahaniyan
इस संचयन की कहानियाँ एकाधिक बार दूसरी भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं। ऐसी ज्यादातर सन् साठ के दशक में रची गई कहानियाँ हैं, जो आज भी अपनी सृजनात्मकता के कारण बाकी सृजन से अलग लगती हैं। ऐसी अलग ढंग
168 pages, Paperback
Published January 1, 2017
About the author
गंगा प्रसाद विमल
11 booksगंगाप्रसाद विमल का जन्म उत्तरकाशी, उत्तराखंड में 3 जुलाई 1939 को हुआ। पंजाब विश्वविद्यालय और उस्मानिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्राध्यापन के पेशे से संबद्ध हुए। बाद में केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा विभाग) के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। कार्य-जीवन के अंतिम दिनों में भारतीय भाषा केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए।
वह हिंदी के ‘अकविता’ आंदोलन से संबद्ध रहे थे। ‘बोधि-वृक्ष’, ‘नो सूनर’, ‘इतना कुछ’, ‘सन्नाटे से मुठभेड़’, ‘मैं वहाँ हूँ’, ‘अलिखित-अदिखत’, ‘कुछ तो है’ उनके प्रमुख काव्य-संग्रह है। कविता के साथ ही उन्होंने गद्य की अन्य विधाओं—कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना, अनुवाद, संपादन—में योगदान किया है। ‘कोई शुरुआत’, ‘अतीत में कुछ’, ‘इधर-उधर’, ‘बाहर न भीतर’, ‘खोई हुई थाती’ उनके प्रमुख कहानी-संग्रह हैं। उनके उपन्यास ‘अपने से अलग’, ‘कहीं कुछ और’, ‘मरीचिका’, ‘मृगांतक’ शीर्षक से प्रकाशित हैं। ‘आज नहीं कल’ उनकी नाट्य-कृति है और ‘प्रेमचंद’, ‘समकालीन कहानी का रचना विधान’, ‘आधुनिकता: साहित्य का संदर्भ’ आलोचना-कृति है। उन्होंने संपादक के रूप में ‘अभिव्यक्ति’, ‘गजानन माधव मुक्तिबोध का रचना संसार’, ‘अज्ञेय का रचना संसार’, ‘लावा’ (अंग्रेजी), ‘आधुनिक कहानी’, ‘सर्वहारा के समूह गान’, ‘नागरी लिपि की वैज्ञानिकता’, ‘वाक्य विचार (उलत्सिफेरोव)’, आदि के संकलन में भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त वह अनुवाद के क्षेत्र में भी पर्याप्त सक्रिय रहे और ‘दूरांत यात्राएँ’ (एजिलाबोथा वाग्रयाना की कविताएँ), ‘पितृभूमिश्च’ (क्रिस्तो बोतेव की कविताएँ), ‘पर्वतों की वादियों के परे’ (एमिल्न्यान स्तानेव का उपन्यास), ‘हरा तोता’ (मिचियो ताकियामा का उपन्यास), ‘जन्मभूमि तथा अन्य कविताएँ’ (निकोला-व्पत्सारोव की कविताएँ), ‘उद्गम’ (कामेन काल्प्चेव का उपन्यास), ‘शाश्वत पंचांग’ (ल्यूबोमीर लेक्चेव की कविताएँ), ‘वनकथा’ (श्रेष्ठ बल्गारियाई कहानियाँ), ‘तमाम रात आगम’ (विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ), ‘मार्ग तथा अन्य कविताएँ’ (जर्मन डोगनबड्स की कविताएँ) आदि के रूप में योगदान किया।
वह पोयट्री पीपुल प्राइज़ (यूएस), यावरोव सम्मान, दिनकर सम्मान, अंतरराष्ट्रीय स्कॉटिश पोयट्री पुरस्कार, भारतीय भाषा पुरस्कार, कुमारान आशान पुरस्कार, संगीत अकादेमी सम्मान आदि से सम्मानित किए गए।
वह हिंदी के ‘अकविता’ आंदोलन से संबद्ध रहे थे। ‘बोधि-वृक्ष’, ‘नो सूनर’, ‘इतना कुछ’, ‘सन्नाटे से मुठभेड़’, ‘मैं वहाँ हूँ’, ‘अलिखित-अदिखत’, ‘कुछ तो है’ उनके प्रमुख काव्य-संग्रह है। कविता के साथ ही उन्होंने गद्य की अन्य विधाओं—कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना, अनुवाद, संपादन—में योगदान किया है। ‘कोई शुरुआत’, ‘अतीत में कुछ’, ‘इधर-उधर’, ‘बाहर न भीतर’, ‘खोई हुई थाती’ उनके प्रमुख कहानी-संग्रह हैं। उनके उपन्यास ‘अपने से अलग’, ‘कहीं कुछ और’, ‘मरीचिका’, ‘मृगांतक’ शीर्षक से प्रकाशित हैं। ‘आज नहीं कल’ उनकी नाट्य-कृति है और ‘प्रेमचंद’, ‘समकालीन कहानी का रचना विधान’, ‘आधुनिकता: साहित्य का संदर्भ’ आलोचना-कृति है। उन्होंने संपादक के रूप में ‘अभिव्यक्ति’, ‘गजानन माधव मुक्तिबोध का रचना संसार’, ‘अज्ञेय का रचना संसार’, ‘लावा’ (अंग्रेजी), ‘आधुनिक कहानी’, ‘सर्वहारा के समूह गान’, ‘नागरी लिपि की वैज्ञानिकता’, ‘वाक्य विचार (उलत्सिफेरोव)’, आदि के संकलन में भूमिका निभाई है। इसके अतिरिक्त वह अनुवाद के क्षेत्र में भी पर्याप्त सक्रिय रहे और ‘दूरांत यात्राएँ’ (एजिलाबोथा वाग्रयाना की कविताएँ), ‘पितृभूमिश्च’ (क्रिस्तो बोतेव की कविताएँ), ‘पर्वतों की वादियों के परे’ (एमिल्न्यान स्तानेव का उपन्यास), ‘हरा तोता’ (मिचियो ताकियामा का उपन्यास), ‘जन्मभूमि तथा अन्य कविताएँ’ (निकोला-व्पत्सारोव की कविताएँ), ‘उद्गम’ (कामेन काल्प्चेव का उपन्यास), ‘शाश्वत पंचांग’ (ल्यूबोमीर लेक्चेव की कविताएँ), ‘वनकथा’ (श्रेष्ठ बल्गारियाई कहानियाँ), ‘तमाम रात आगम’ (विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ), ‘मार्ग तथा अन्य कविताएँ’ (जर्मन डोगनबड्स की कविताएँ) आदि के रूप में योगदान किया।
वह पोयट्री पीपुल प्राइज़ (यूएस), यावरोव सम्मान, दिनकर सम्मान, अंतरराष्ट्रीय स्कॉटिश पोयट्री पुरस्कार, भारतीय भाषा पुरस्कार, कुमारान आशान पुरस्कार, संगीत अकादेमी सम्मान आदि से सम्मानित किए गए।
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