आज़ाद जीवन एक आज़ाद मन की अभिव्यक्ति है। यदि व्यक्ति का मन मुक्त नहीं है तो मुक्ति आंदोलन शायद ही कभी अपने उद्देश्य की पूर्ति कर पाएँगे। ऐसा ही एक आंदोलन महिला मुक्ति आंदोलन है जिसका उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक समानता देना है, लेकिन वो भी उन मूल कारणों को संबोधित करने में असफल रहा है जो स्त्री मन की दासता का कारण बने। स्त्री का वस्तुकरण होना ही उसकी दासता का प्रमुख कारण है। इस दासता से मुक्ति तभी सम्भव है जब स्त्री खुद को वस्तुमात्र ना समझे। दुनिया स्त्री का शोषण करती है उसे एक भौतिक वस्तु जानकर और स्त्री वो शोषण सहती है क्योंकि देह से उसने अपना तादात्म्य बैठा लिया है। इस अति महत्वपूर्ण पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने करुणापूर्वक शरीर का सही स्थान बताया, उसके आग्रहों का सुझाव दिया, और स्त्री के मन की मुक्ति के मार्ग पर प्रकाश डाला है। उनके शब्दों में: "स्त्री जब अपना स्त्रीत्व (प्राकृतिक वृत्तियाँ) छोड़ देती है तो वासना की वस्तु न रह कर एक पूज्यनीय देवी बन जाती है।"
Every girl should read this book and every person who loves, respects, or cares for a girl, whether she is your sister, friend, mother or partner.
This book doesn’t just talk about women, it helps you understand the depth of real womanhood, strength and inner clarity. It challenges illusions, breaks societal conditioning, and brings a fresh perspective on what it really means to be a woman in today’s world.
Highly recommended for anyone who wants to understand themselves and the women in their life more deeply.