किसी भी साहित्यिक कृति में रचनाकार के स्वभाव की झलक होती है, उसका परिवेश दृष्टिगत होता है और उसकी विचारधारा परिलक्षित होती है। 'एक योगी का त्यागपत्र' ऐसी ही एक रचना है जिसमें साहित्यकार की स्वयं की जीवनशैली भी दृष्टव्य है। 'स्पर्श' आस-पास घूमते- विचरते इस उपन्यास में लेखक की वैचारिक छवि का अवलोकन किया जा सकता है।मानव सभ्यता के आरंभ से ही साहित्य भावों, विचारों और संस्कृतियों की अभिव्यक्ति और परिचय का स्रोत और माध्यम रहा है। यही है विधा है जिसके द्वारा हजारों वर्ष पुरानी सभ्यताओं में निहित जीवन मूल्यों का बोध हो पाता है । समाज के सुदृढ़ स्तम्भ के रूप में साहित्य की सतत महत्ता और उपादेयता है। लोकहित चिंतन करने वाले सजग साहित्यकारों की अनथक साधना से ही विशिष्ट साहित्यिक कृतियां ज