पुराणों को जाने बिना हिन्दू धर्म के वैराट्य को जानना संभव नहीं है। वेदों में विष्णु, अदिति तथा रुद्र तीनों हैं किंतु भगवान 'विष्णु' को 'वासुदेव' स्वरूप की, भगवान 'रुद्र' को 'महादेव' स्वरूप की तथा 'अदिति' को भगवती स्वरूप की प्राप्ति पुराणों में ही आकर होती है। 'भागवत् धर्म' पुराणों की ही देन है जिसे वासुदेव धर्म, पांचरात्र धर्म, सात्वत् धर्म तथा वैष्णव धर्म कहा जाता है। इसी को समग्र रूप से 'सत्य सनातन धर्म' तथा हिन्दू धर्म भी कहा जाता है। अतः सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पुराणों का महत्त्व भारतीय संस्कृति के अध्ययन की दृष्टि से कितना अधिक महत्त्वपूर्ण है! 'वैष्णव धर्म' की भांति 'शैव धर्म' के विकास के लिए आवश्यक बीज तत्व भी इन्हीं पुराणों से मिला है। भगवान् श्रीकृष्ण के मुख से निःसृत जिस 'è