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महाभारत कथा : मनु पुत्र इल नर हूँ कि नारी

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राजा इल सूर्य के पौत्र, वैवस्वत मनु के ज्येष्ठ पुत्र तथा सूर्य वंश के संस्थापक इक्ष्वाकु के भाई थे। राजा इल को एक माह नर और एक माह नारी के रूप में रहने का श्राप मिला था। इस श्राप के कारण नारी इल का एक पति था तो पुरुष इल की अनेकों पत्नियाँ थी । राजा इल अनेक पुत्र की माता था तो अनेक पुत्रों का पिता भी था।
इल का पति चंद्रमा पुत्र बुध था। इल और बुध की एक अनूठी वैवाहिक जोड़ी थी। दोनों शापित थे। दोनों नर भी थे और नारी भी। अंत में दोनों के मिलन से एक समीकरण बन गया - दुर्भाग्यपूर्ण + दुर्भाग्यपूर्ण = अति-भाग्यशाली
राजा इल और बुध के मिलन से उत्पन्न पुत्र पुरुरवा द्वारा ही महान चन्द्र वंश की स्थापना हुई थी।

86 pages, Kindle Edition

Published September 30, 2022

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