फणीश्वरनाथ रेणु का सम्पूर्ण साहित्य राजनीति की मज़बूत बुनियाद पर स्थित है। उन्होंने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को कभी राजनीति से कमतर नहीं माना। ‘मैला आँचल’ और 'परती परिकथा’ की भाँति 'जुलूस’ उपन्यास पूर्णिया ज़िले में नए बस रहे एक गाँव नबीनगर और पूर्व-प्रतिष्ठित गोडियर गाँव के पारस्परिक सम्बन्धों और संघर्षों की कथा है।इस उपन्यास में ‘रेणु’ ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् होनेवाले दंगों के कारण पूर्वी बंगाल से विस्थापित होकर भारत आए लोगों के दु:ख-दर्द की गाथा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। साथ ही उन्होंने यह भी दिखाना चाहा है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के चौदह-पन्द्रह साल बाद भी गाँव में कितना अन्धकार, अन्धविश्वास, ग़रीबी और भुखमरी आदि व्याप्त है और लोè
पुस्तक - जुलूस लेखक - फणीश्वरनाथ रेणु प्रकाशन वर्ष - १९६६
फणीश्वरनाथ रेणु की 'जुलूस' एक ऐसा उपन्यास है जो विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल से विस्थापित होकर भारत आए लोगों के जीवन के बदलावों, चुनौतियों और शरणार्थियों के दुःख एवं संघर्ष को बड़ी ही मार्मिकता से उकेरता है। यह उपन्यास पूर्णिया जिले के दो गांवों, नबीनगर और गोडियर के बीच के तनाव और संघर्षों की कहानी है। उपन्यास में विभाजन के कारण हुए मानवीय नुकसान को बड़ी बारीकी और यथार्थवादी ढंग से चित्रित किया है। शरणार्थियों की बेबसी, उनके मन में उठने वाले सवाल और उनकी पीड़ा को आंचलिक शब्दों में पिरोया गया है। रेणु ने उपन्यास में गांव के जीवन को बड़ी खूबसूरती से चित्रित किया है। गांव के रीति-रिवाज, त्योहार और लोगों के आपसी रिश्ते को बड़ी बारीकी से दिखाया गया है। उपन्यास में सामाजिक असमानता, जातिवाद और राजनीति जैसे मुद्दों को भी उठाया गया है और बताया हैं कि राजनीतिक उथल-पुथल ने लोगों के जीवन को प्रभावित किया और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया। उपन्यास में महिलाओं की स्थिति को भी उठाया गया है। विभाजन के बाद महिलाओं को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनका वर्णन उपन्यास में किया गया है। पवित्रा और उसका परिवार: 'जुलूस' का केंद्रबिंदु हैं पवित्रा उपन्यास 'जुलूस' की मुख्य पात्र है। वह एक विस्थापित युवती है जिसका परिवार विभाजन के कारण अपना घर और जमीन छोड़कर भारत आ जाता है। पवित्रा का चरित्र उपन्यास को एक गहराई और भावनात्मक आयाम प्रदान करता है। पवित्रा का परिवार विभाजन के कारण होने वाले संघर्षों और कठिनाइयों का प्रतीक है। वे अपना घर और जमीन खो देते हैं और एक नए स्थान पर जीवन शुरू करने के लिए संघर्ष करते हैं। पवित्रा के माता-पिता और गांव वाले सभी ने विभाजन के दर्द को झेलते हैं पवित्रा एक लचीली युवती है जो कठिन परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़ती। वह एक मजबूत इरादों वाली युवती है जो अपने परिवार का समर्थन करती है और वह अपने आसपास के लोगों के दुख को समझती है। पवित्रा का जीवन विभाजन के बाद पूरी तरह बदल जाता है। वह एक नए गांव में शरण लेती है और वहां उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उसे न केवल आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है बल्कि सामाजिक असमानता और जातिवाद का भी सामना करना पड़ता है। पवित्रा का चरित्र उपन्यास को एक मानवीय स्पर्श देता है। वह एक ऐसी युवती है जिसके साथ पाठक आसानी से जुड़ सकते हैं। पवित्रा के माध्यम से रेणु ने विभाजन के दर्द को बहुत ही मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है जुलूस के अन्य पात्र जैसे कि गोपाल पाइन, छिदामदास, हरिप्रसाद जादव, रामजी गोढ़ी, तालेवर गोढ़ी, रामचंद्र चौधरी, जयराम सिंह, योगेशदास, कालाचांद , संध्या इत्यादि कहानी को सजीवता प्रदान करते हैं। 'जुलूस' उपन्यास में गांव के लोगों द्वारा शरणार्थियों का स्वागत एक जटिल मुद्दा है। कुछ लोगों ने शरणार्थियों का स्वागत किया कुछ गांव वाले शरणार्थियों की दुर्दशा देखकर दयालुता दिखाते हैं और उनकी मदद करते हैं। वे उन्हें भोजन, कपड़े और रहने की जगह देते हैं। कुछ लोग धार्मिक भावनाओं से प्रेरित होकर शरणार्थियों की मदद करते हैं। वे मानते हैं कि सभी इंसान भगवान के बच्चे हैं और उन्हें मदद करना उनका धार्मिक कर्तव्य है। कुछ लोग सामाजिक दायित्व की भावना से प्रेरित होकर शरणार्थियों की मदद करते हैं। वे मानते हैं कि सभी को एक साथ रहने के लिए सहयोग करना चाहिए। कुछ लोग शरणार्थियों को अजनबी मानते हैं और उनसे डरते हैं। वे सोचते हैं कि शरणार्थी उनके संसाधनों पर बोझ बन जाएंगे। फणीश्वरनाथ रेणु का उपन्यास 'जुलूस' अपनी भाषा शैली के लिए भी जाना जाता है। रेणु ने उपन्यास में एक ऐसी भाषा का प्रयोग किया है जो न केवल पात्रों और उनके परिवेश के अनुकूल है, बल्कि कहानी की भावनाओं को भी गहराई से उभारती है। रेणु ने उपन्यास में बिहार के ग्रामीण इलाकों की बोली का खूबसूरती से प्रयोग किया है और बंगाली भाषा का मीठा प्रयोग किया हैं जिससे उनके शब्दों में स्थानीय रंग झलकता है, जो पाठक को कहानी के वातावरण में खींच ले जाता है। रेणु ने अपनी भाषा के माध्यम से पात्रों की भावनाओं को बड़ी गहराई से व्यक्त किया है। चाहे वह दुःख हो, खुशी हो या गुस्सा, रेणु ने हर भावना को शब्दों में बांधने में महारत हासिल की है।रेणु ने अपनी भाषा में प्रतीकों का भी खूब प्रयोग किया है। उन्होंने कई बार प्रकृति के चित्रण के माध्यम से पात्रों के मनोदशा को व्यक्त किया है। उपन्यास में कई जगहों पर लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। इन लोकगीतों ने कहानी को और अधिक समृद्ध बनाया है। रेणु की भाषा ने उपन्यास को एक यथार्थवादी रूप दिया है। पाठक को लगता है कि वह वास्तव में उस गांव में मौजूद है। जुलूस' एक ऐसा उपन्यास है जिसे हर किसी को पढ़ना चाहिए। यह उपन्यास हमें विभाजन के दर्द, शरणार्थियों के संघर्ष और सामाजिक असमानता के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विभाजन के बाद के भारत के ग्रामीण समाज पर एक गहराई से किया गया चिंतन है।
जुलूस is primarily about a group of re-settlers who have migrated from East Bengal(now Bangladesh) to settle in Independent India. The major conflict arises from the interaction between the local villagers and the re-settlers. Yet the issue of migration has been treated at a superficial level. Renu introduces various characters, gives them a little background, establishes their relationship with few other characters and then abandons them. He never develops their story to a conclusive end. The story moves from one character to another and its very difficult to keep record of various characters and their relationships with other people. Added to this are passages in Bengali and when a character sings a song (which they do frequently), the whole song is written in the text. It seems that the writer is trying to experiment with the language and the medium but has failed to produce a cohesive result. The novella ultimately is a collage of images and characters that don’t fit together to form a structured narrative.
brilliant novella..story of a small town which experiences immigration of Bengalis from Bangladesh. of the dynamics of their assimilation in the already divided society.. this book is underated..must read for hindi readers specially renu fans.