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बन्द गली का आख़िरी मकान

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116 pages, Hardcover

First published January 1, 1969

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Dharamvir Bharati

34 books102 followers

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1 star
3 (3%)
Displaying 1 - 5 of 5 reviews
Profile Image for Ved Prakash.
189 reviews28 followers
November 19, 2017
इसमें चार कहानियाँ हैं -
1) गुलकी बन्नो
2)सावित्री नंबर 2
3)यह मेरे लिए नहीं
4)बंद गली का आखिरी मकान

सारी कहानियाँ बहुत मार्मिक है।

***
चारो कहानियाँ ग्रामीण और निम्न वर्ग के पात्रों को लेकर बुना गया है।

"गुलकी बन्नो"

एक बेसहारा परित्यक्ता की कहानी है। पीहर (मायका) गाँव में आस- पड़ोस , जात-प्रजात वालों का उसके प्रति व्यवहार के साथ - साथ बाल मनोवृति को भी आँका गया है। मोहल्ले के शरारती बच्चे एक अपाहिज (कुबड़ी है ये पात्र) के साथ कैसा बर्ताव करते हैं और मन के अंदर से कैसे होते हैं, ये भी इस कहानी का एक पार्ट है।

जिस पति ने मार कर कुबड़ा बना दिया उसके प्रति एक अपाहिज, बेसहारा औरत की क्या भावना होती है ? क्या वो उसके पास लौटना चाहेगी या बदला लेना ? इसी विषय पर यह कहानी है।

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"सावित्री नंबर 2"

इसमें स्त्री मनोविज्ञान को एकदम खोल कर रख दिया है। असाध्य बीमारी की वजह से युवावस्था में ही खाट पकड़ी हुई औरत का अपने प्रति केयरिंग पति से चिढ़/जलन। मायके में रहते हुए, बीमारी की वजह से, सबके प्रति अति कटुता आ जाना और फिर इस अवस्था में भी कहीं और प्रेम की छाँव तलाशना। क्या इन सब changes और बातों से वो अनभिज्ञ होती है या इसे एक हथियार के रूप में यूज़ करती है ?

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"यह मेरे लिए नहीं"

चारों में ये सबसे अच्छा लगा। विधवा माँ और नवजवान बेटे के बिच,जनरेशन गैप और priorities में अंतर के कारन तनाव/टकराव। सही कौन है ? माँ, जो की पैतृक घर से इस कदर जुड़ी है कि घर की दिवार में खरोच आता है तो चोट उन्हें लगती है या फिर बेटा जिसे घर की दीवारों से मोह नहीं, मरम्मत पर खर्च मूर्खता लगता है। माँ जो नाते-रिश्तेदारों-रिवाजों से जुड़ी रहना चाहती है या बेटा जिन्हें इनका असली रूप पता है और इनसे कटके रहना चाहता है। इसी द्वन्द की कहानी है। अंत में जीतता कौन है ? क्या ऐसे द्वन्द में जित ही हार और हार ही जित होती है? इसी मनोस्थिति को लेकर बुनी गई है ये कहानी।


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"बंद गली का आखिरी मकान"

ये भी रिश्ते और मनोभाव की complex कहानी है। एक ईमानदार कायस्थ मुंशी एक परित्यक्ता ब्राह्मणी और उसके दो बेटों को आश्रय देते हैं। कास्ट में अंतर के कारन आनेवाला सामाजिक परेशानियों का सामना हिम्मत से करनेवाला ये पुरुष बच्चों को बेटे जैसा पालते हैं। स्त्री भी इन्हें पति सा सम्मान और बड़ा बेटा, जो की लायक/पढ़नेवाला है, पिता सा ही सम्मान देता है। वक्त के साथ बेटा आत्मनिर्भर होता है, स्त्री भी मुखर और मज़बूत होती जाती और पुरुष कमजोर। इस परिवर्तन का रिश्तों के बिच के बंधन और भावना पर क्या असर पड़ता है ? क्या ये परित्यक्ता स्त्री पूर्ण रूप से अपने पति और अपने ब्राह्मण समाज से अपने को काट पाई है ? इन्हीं सूत्र को लेकर बहुत भावपूर्ण कहानी रची गई है।

Profile Image for Kumar Harsh.
21 reviews1 follower
September 30, 2017
मार्मिकता क्या होती है, अगर ये जानना हो ये कहानियां पढ़े!
10 reviews25 followers
July 2, 2017
Dharamvir Bharti is always my favourite hindi writer.He wrote in the language of common people depicting common problems of middle class citizens.
This book has a collection of four stories in the following sequence-
1.Gul ki Banno
2.Savitri number do
3.Yah mere liye nahin
4.Band gali ka akhiri makaan.
Story number three i.e. yah mere liye nahin set me into tears many times.The story describes the complex relationship between a widow and her only son and the generality of relationship with her kiths and kins. The story makes a point how a job, sarkari wala is everything for middle class, a choice less contradictions about life.Inner conflicts surrounding nook and corner of proles.
It's a worth read.
Ladkiyaan aaplog pahli kahani ko padjiye or samajhiye i.e. Gul ki Banno.
Profile Image for Goldi Tewari.
Author 1 book3 followers
December 24, 2020
'बंद गली का आखिरी मकान' धर्मवीर भारती जी का एक चार कहानियों का गौरवग्रंथ है। अवधी भाषा का यदा कदा प्रयोग किरदारों व कहानियों में जान फूंक देता है। ऐसा लगता है जैसे कहानी यहीं कहीं हमारी आँखों के समक्ष घटित हो रही है।

१. इस किताब के खंडो की श्रृंखला में प्रथम कहानी है 'गुलकी बन्नो'। यह एक अभागी, विकलांग स्त्री की दारुण-गाथा होते हुए भी समाज में अभी भी जीवंत करुणा की विचित्र सी कहानी है। आज के युग में इस कहानी की मुख्य पात्र, गुलकी के व्यक्तित्व को समझना कुछ मुश्किल सा है।

२. दूसरी कहानी है 'सावित्री नंबर 2' जिसको पढ़कर अचरज होता है की हम अक्सर क्यों जीवन रुपी इस उपहार को हल्के में लेते है। इस कहानी के उद्धरण, "वहाँ जिंदगी समुन्दर की तरह लहराती है और मेरी खिड़की से टकराकर लौट जाती है।" ने रुलाई सी ला दी।

३.'यह मेरे लिए नहीं' माँ व बेटे के रिश्ते की अनूठी कहानी है ये। दोनों के एकदूसरे के प्रति जटिल व पृथक अपेक्षाओं का अद्भुत वृतांत है। भावनात्मक एवं वास्तविक जरूरतों के बीच इन दोनों की जिंदगी एक दूसरे से उलझती-संभलती सी रहती है। यह कहानी यह समझने के लिए पढ़िए कि पीढ़ी-अंतराल और आभाव कैसे मानवीय संबंधो में असर करते है।

४. 'बंद गली का आखिरी मकान'इस किताब की अंतिम और सबसे लंबी कहानी है। ख़ून के व अपनाये हुए रिश्तों की मर्मज्ञ दास्तान है यह। मनुष्य में बदलते हुए ओहदे, समय व उम्र के कारण आनेवाले परिवर्तनों का चित्रण करना इस कहानी का का मुख्य उद्देश्य है। इसके मुख्य पात्रों के व्यक्तित्व तो एकदम सरल है पर उनके परस्पर संबधों में जटिलता से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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