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116 pages, Hardcover
First published January 1, 1969
१. इस किताब के खंडो की श्रृंखला में प्रथम कहानी है 'गुलकी बन्नो'। यह एक अभागी, विकलांग स्त्री की दारुण-गाथा होते हुए भी समाज में अभी भी जीवंत करुणा की विचित्र सी कहानी है। आज के युग में इस कहानी की मुख्य पात्र, गुलकी के व्यक्तित्व को समझना कुछ मुश्किल सा है।
२. दूसरी कहानी है 'सावित्री नंबर 2' जिसको पढ़कर अचरज होता है की हम अक्सर क्यों जीवन रुपी इस उपहार को हल्के में लेते है। इस कहानी के उद्धरण, "वहाँ जिंदगी समुन्दर की तरह लहराती है और मेरी खिड़की से टकराकर लौट जाती है।" ने रुलाई सी ला दी।
३.'यह मेरे लिए नहीं' माँ व बेटे के रिश्ते की अनूठी कहानी है ये। दोनों के एकदूसरे के प्रति जटिल व पृथक अपेक्षाओं का अद्भुत वृतांत है। भावनात्मक एवं वास्तविक जरूरतों के बीच इन दोनों की जिंदगी एक दूसरे से उलझती-संभलती सी रहती है। यह कहानी यह समझने के लिए पढ़िए कि पीढ़ी-अंतराल और आभाव कैसे मानवीय संबंधो में असर करते है।
४. 'बंद गली का आखिरी मकान'इस किताब की अंतिम और सबसे लंबी कहानी है। ख़ून के व अपनाये हुए रिश्तों की मर्मज्ञ दास्तान है यह। मनुष्य में बदलते हुए ओहदे, समय व उम्र के कारण आनेवाले परिवर्तनों का चित्रण करना इस कहानी का का मुख्य उद्देश्य है। इसके मुख्य पात्रों के व्यक्तित्व तो एकदम सरल है पर उनके परस्पर संबधों में जटिलता से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।