विभाजन कि त्रासदी कहती अमृता प्रीतम की ‘पिंजर’ हो,खुशवंत सिंह की ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’,मंटो की कहानियाँ हों, गुलजार की ‘रावी पार’ या भीष्म साहनी की ‘तमस’, इन्हे पढ़ना कभी आसान नहीं होता। भीष्म साहनी की ‘तमस’ मैंने लगभग तीन या चार बार पढ़ी होगी। ,पर हर बार पढ़ के दिल उतना ही बेचैन होता है,जैसे पहली बार पढने पे हुआ था। समयकाल आज़ादी से पहले का,बस पांच दिन की कहानी,पर जेहन में हमेशा जिंदा रहने वाली,सदियों से प्रासंगिक। अभी जब इस महामारी के संकट के बीच भी धार्मिक वजहों से हुई हिंसा कि खबरें सुनता हूँ तो फिर लगने लगता है कि हालात अब भी वैसे ही हैं। कहानी मे एक जगह एक अंग्रेज पात्र कहता है “हुकूमत करनेवाले यह नहीं देखते कि प्रजा में कौन-सी समानता पायी जाती है, उनकी दिलचस्पी तो यह देखने में होती है कि वे किन-किन बातों में एक-दूसरे से अलग हैं।’’ हुकूमत करने वाले जरूर बदल गए पर उनका फ़लसफ़ा अब तक वही है,और कारगर भी है।
आपस में सदियों से साथ रहने वाले, एक दूसरे के साथ हँसने बोलने वाले, साथ साथ बड़े होने वाले,बचपन के,संग पढे लिखे दोस्त कैसे बस एक अफवाह से, एक छोटी सी घटना से खून के प्यासे हो जाते हैं? ये सदियों,पीढ़ियों के संस्कार हैं या खून में ही ऐसा कुछ है,जो एक कौम को दूसरे पे भरोसा नही करने देता,एक अनजान सी नफरत पलती रहती है,कहीं दबी हुई.सह्द्र्यता,सदभाव,या भाईचारे के आवरण में,जो मौका मिलते ही उभर आती है। एक दृश्य में एक मुस्लिम अपने हिन्दू मित्र के मुस्लिम मोहल्ले में घर छोड़ते वक़्त छूट गये जेवर लाने जाता है, तब जाने किस अदृश्य प्रेरणा से, एक हिन्दू नौकर को मार देता है,बस क्यूंकि वो एक हिन्दू था। पूरी पुस्तक में कई ऐसे प्रसंग है, जो आप को सोचने के लिए मजबूर कर देंगे। कहानी पुरानी है,पर आज के दौर में जब धर्म व्यवसाय हो चुके हैं,और लोगों की नाजुक भावनाएं छोटी छोटी बातों पे आहत हो जाती है,ये और भी भयावह लगती है।
पहले मुझे लगता था,कि कहानी के लिए नायक नायिका,या एक खलनायक का होना जरुरी है,पर इसका नायक इसकी कहानी है,एक छोटा सा गाँव है,जो गवाह है,हमेशा सदभाव से सभी धर्मों के व्यक्तियों का एक छोटी इस घटना से एक दुसरे के दुश्मन बन जाने का। पूरे उपन्यास में कोई बुरा नही,कोई गलत नही है,पर कोई सही नही है,काल,भय,अफवाहें,शक,शुबहा और विभिन्न घटनाओ को जन्म देते रहता है,और हर इंसान ये जानते और मानते हुए कि वो गलत कर रहा है,विवश हो जाता है। लेखक ने बहुत ही खूबी से विभिन्न द्रश्यों से एक गंभीर कहानी कही है.सजीव चित्रण क्या होता है,इसका सजीव उदहारण है ये उपन्यास। एक अवश्य पढ़ा जाने वाला उपन्यास,कालजयी.अद्भुत