श्रृंगेरीमठ की अविच्छिन्न यति परम्परा में परिगणित ब्रह्मलीन अनन्तश्री दण्डी स्वामी परमानन्द भारती जी महाराज ने वेदान्त के प्रारम्भिक जिज्ञासुओं के मार्गदर्शन हेतु सरल, सुबोध एवं सुव्यवस्थित शैली में प्रस्तुत पाठ्यपुस्तक की रचना की है। जो कि शांकरभाष्यों पर पूर्णतः आधारित है। आशा है कि सहृदय जिज्ञासुलोग, पूज्य श्रीस्वामीजी के अन्य ग्रन्थों के ही तुल्य, प्रस्तुत कृति का भी भक्तिपूर्वक अध्ययन एवं अनुशीलन करेंगे।