जोश साहब बड़े नफासतपसंद, साहसी, निडर और भावुक शायर थे। जन्म 5 दिसंबर 1894 को एक जागीरदार घराने में हुआ। परदादा भी शायर थे, इसलिए काव्यप्रवृत्ति के साथ साथ घमंड, स्वेच्छाधार, विद्रोह और अहम भी उनकी शायरी की खूबी है।
बंटवारे में पाकिस्तान जाना उनपर भारी पड़ा और इसका मलाल उन्हे ताउम्र रहा। 1983 में देहांत हो गया। बहरहाल जोश साहब में अभिव्यक्ति की अद्भुत शक्ति थी। वह अल्फाज में आग भर सकते थे और दिलों में आग लगा सकते थे। इसलिए स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी रचनाओं ने क्रांतिकारियों को खूब प्रेरित किया।
हश्र में भी खुसरवाना शान से जाएंगे हम
और अगर पुरसिश न होगी तो पलट आएंगे हम