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"परन्तु गंग सर्वज्ञ ने और भी ज्योतिर्लिंग को अपने अंक में लपेट लिया। उन्होंने आँख खोलकर करुण दृष्टि से महमूद की ओर देखा, और धीरे स्वर से कहा, 'पहले सेवक और पीछे देवता।' उन्होंने ज्योतिर्लिंग पर अपना हिमधौत सिर रख दिया। अमीर ने गूर्ज का भरपूर वार किया। सर्वज्ञ का भेजा फट गया और उनके गर्म रक्त से ज्योतिर्लिंग लाल हो गया। उनके मुँह से ध्वनि निकली, 'ओम्', और प्राण-पखेरु ब्रह्मरंध्र को भेदकर उड़ गए। अमीर ने गूर्ज का दूसरा वार और फिर तीसरा वार किया। ज्योतिर्लिंग के तीन टुकड़े हो गए।"
यहाँ पर भक्ति की पराकाष्ठा दिखती है। यह वह दृश्य था जहाँ एक भक्त ने अपने आराध्य से पहले स्वयं पर प्रहार लिया।
उपन्यास के वह अंश अत्यंत प्रभावशाली हैं, जहाँ महमूद गजनी सोमनाथ मंदिर जाने के मार्ग में पड़ने वाले हर राज्य और वहाँ की जनता पर आक्रमण करता है, मंदिर तोड़ता है, अत्याचार करता है और लूटता है। यह भाग कल्पना पर नहीं बल्कि इतिहास पर आधारित है, इसलिए यह झकझोरता है और पीड़ा का अनुभव कराता है।
किन्तु जब लेखक ने कल्पना के सहारे गजनी का मानवीकरण किया तो वह स्वीकार्य नहीं हुआ। क्या वह लूट का धन छोड़ देता था? क्या वह स्त्रियों को देखकर कुछ अनुचित नहीं करता था? यह सब इतिहास नहीं, कोरी कल्पना है।
शोभना का प्रसंग तो और भी अप्राकृतिक प्रतीत होता है। पहले उसने अपने प्रेमी को गजनी का साथ देने से नहीं रोका, जबकि उसके प्रेमी ने उसे बताया था कि वह मुसलमान हो गया है और गजनी के साथ मिलकर अपने ही देश के लोगों को मारेगा तथा सोमनाथ मंदिर तोड़ेगा, तब भी उसने कुछ नहीं किया।और जब सज्जन सिंह ने सूझबूझ से गजनी और उसकी सेना को रेगिस्तान के बवंडर में फँसा दिया और अमीर मृत्यु के कगार पर पहुँचा, तब शोभना उसे बचाने पहुँच जाती है। जबकि शोभना जानती थी कि गजनी कितना आक्रामक है, उसने इस देश के साथ क्या किया, सोमनाथ मंदिर के साथ क्या किया, और चोला रानी के साथ क्या करने वाला था। हम तो सोच रहे थे कि जब अमीर को यह पता चलेगा कि शोभना चोला रानी होने का ढोंग कर रही थी, तो वह उसे मार डालेगा, लेकिन यहाँ उल्टा एक अजीब प्रेम प्रसंग चला दिया गया।
यह कल्पना स्वीकार्य नहीं। जितना इतिहास था वह अच्छा लगा, लेकिन कल्पना नहीं। स्वयं लेखक ने भी अंत में स्वीकार किया है कि इस उपन्यास को लिखने में उन्होंने कल्पना का सहारा लिया है। इसलिए आगे अब कन्हैयालाल मुंशी का जय सोमनाथ या कोई अन्य प्रामाणिक इतिहास-ग्रंथ पढ़ेंगे जिसमें कल्पना का अंश न हो।