नये अनुभव, उपलब्धियाँ, नये संबंध, दुविधायें और सतत चलते रहना; यह तो जीवन की रीत है इस यात्रा के कई सोपान सरल होते हैं तो कई कठिन, कभी हम कृतज्ञता और आशा से भर उठते हैं तो कभी निराशा से इन उद्बोधित अवस्था में हम सहज अपने हृदयतल को टटोलते हैं, और वहाँ मिलता क्या है - वह सहज सरल वात्सल्य, वह आशा एवं प्रेरणा भरे शब्द, किस्से और कहानियाँ जो माँ ने वर्षों पहले सुनायी थीँ हमारी प्रेरणा, जिजीविषा, परिस्थितियों से जूझकर प्रगति करते रहने का स्रोत वहीँ मिलता है
फिर हृदय की गहराइयों में उत्प्रेरित भाव शब्दों में ओत प्रोत हो कविता का रूप ले लेते हैं और कभी रेखाओं व रंगों में समाहित होकर चित्रों का
मैं जानता हूँ माँ, मेरे बिन कहे तू समझ जाती है फिर भी चाहूँ लिखना उन बातों को और अभिव्यक्ति करना, चित्रों में, गीतों में किस्सों में यह संकलन बस वही है :
वही बातें जो कही ना गईं, वही बातें जो मन में रहीं
राजीव द्विवेदी : वैसे तो राजीव एक रोबोट विशेषज्ञ हैं अपनी मशीनों में जीवन डालने का प्रयत्न तो सतत रहता ही है, वहीं वे इसी उधेड़बुन में भी लगे रहते हैं - क्या संभव है कि समय उसी नदी के सामान है जो कभी वेगमय हो और कभी मद्धम हो जीवन रूपी शैल को स्मृति-उत्कीर्णित करता है या ऐसा है कि जीवन उस काष्ठ खंड के समान हो जो कि उस नदी की लहरों के संग कई देश , वन और पर्वतों का भ्रमण करता है खैर जो भी हो, उनके भाव अक्सर अभिवक्ति हेतु व्याकुल हो जाते हैं, ये कविताएं उन्ही भावनाओं और स्मृतियों की अभिव्यक्ति हैं
मनीष द्विवेदी : सरल चित्रों के माध्यम से मनीष अक्सर अपनी बातें कहते हैं । विविध शैलियों में बनाए चित्र पर भारतीय लोक शैलियों और बचपन में सुनी हुई कथाओं का प्रभाव दिखता है । तीक्ष्ण रेखाओं से बने चित्रों में आधुनिक और पारम्परिक कला का समावेश है ।