पुस्तक परिचय:आप ईश्वर में विश्वास करते हैं और आपने उस परमपिता के बारे में अनेकानेक ग्रंथों में पढ़ा भी होगा ,पर क्या आपने कभी उसको महसूस किया है? 17 अक्टूबर, 2000 को पहली बार मुझे यह अनुभव हुआ कि परमात्मा मेरे भीतर विद्यमान है। तदुपरांत मैंने कई बार एवं कई प्रकार से परखा कि क्या वह परमात्मा सचमुच हमारी मदद करता है? किसी न किसी रूप में वह हर बार मेरे सामने उपस्थित हुआ। और अब मैं पूरे विश्वास के साथ यह कह सकता हूँ कि ईश्वर हम सबके भीतर विद्यमान है। पर ईश्वर हमें अपनी अनुभूति और उपस्थिति तभी महसूस कराता है जब हम निःस्वार्थ भाव से औरों की मदद करने के लिए तैयार होते हैं।ईश्वरीय जागृति -स्व अनुभव (Awakening! My Experiments with God) में इस पुस्तक के लेखक श्री धर्मेंद्र शर्मा स्पष्ट करते हैं कि ईश्वर को स्वयं के भीतर अनुभव कैस