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Kamleshwar Ki Lokpriya Kahaniyan
भारतीय कथाकारों में कमलेश्वर की लोकप्रियता का कोई जवाब नहीं। न तो उनसे पहले, न ही उनके बाद वैसी लोकप्रियता किसी और को हासिल हो सकी। उन्होंने आरंभ में ही ‘दूरदर्शन’ में लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परिक्रमा’ शुरू किया। बाद में ‘दूरदर्शन’ के महानिदेशक भी बने। आँधी, मौसम, डाक बँगला, द बर्निंग ट्रेन, राम-बलराम जैसी सौ के करीब फिल्में और चंद्रकांता संतति जैसे तमाम सीरियल लिखनेवाले कमलेश्वर ने ‘सारिका’, ‘कथायात्रा’, ‘गंगा’ और ‘श्रीवर्षा’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया। जीवन के आखिरी समय तक अखबारों में कॉलम लिखनेवाले कमलेश्वर की कलम उनके हाथ से कभी छूटी नहीं।
कमलेश्वर की पहली कहानी ‘फरार’ सन् 1946 में कानपुर से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक ‘जय भारत’ में छपी थी, जबकि ‘कॉमरेड भारती’ सन् 1948 में छपी, जिसे उनकी पहली कहानी मान लिया गया था। उन्होंने ढेर सारी कहानियाँ लिखीं, जिनमें से उनकी कुछ लोकप्रिय कहानियाँ इस संग्रह में प्रस्तुत हैं। कहानियाँ अलग-अलग आस्वाद लिये हुए हैं। आशा है सुधी पाठकों को ये कहानियाँ रुचेंगी और अपनी सी लगेंगी।
कमलेश्वर की पहली कहानी ‘फरार’ सन् 1946 में कानपुर से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक ‘जय भारत’ में छपी थी, जबकि ‘कॉमरेड भारती’ सन् 1948 में छपी, जिसे उनकी पहली कहानी मान लिया गया था। उन्होंने ढेर सारी कहानियाँ लिखीं, जिनमें से उनकी कुछ लोकप्रिय कहानियाँ इस संग्रह में प्रस्तुत हैं। कहानियाँ अलग-अलग आस्वाद लिये हुए हैं। आशा है सुधी पाठकों को ये कहानियाँ रुचेंगी और अपनी सी लगेंगी।
158 pages, Kindle Edition
Published January 7, 2022
About the author
Kamleshwar
97 books62 followersKamleshwar (कमलेश्वर) was a prominent 20th-century Hindi writer, and scriptwriter for Hindi cinema and television. Among his most well- known work are the films Aandhi, Mausam, Chhoti Si Baat and Rang Birangi. He was awarded the 2003 Sahitya Akademi Award for his cult Hindi novel Kitne Pakistan (translated in English as Partitions), and also the Padma Bhushan in 2005.
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