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अजातशत्रु

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Play by Jaishankar Prasad

Hardcover

First published January 1, 2011

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Jaishankar Prasad

238 books100 followers

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Displaying 1 - 6 of 6 reviews
Profile Image for Amrendra.
355 reviews17 followers
May 19, 2021
अजातशत्रु प्रसाद जी द्वारा वर्ष 1922 में रचित एक ऐतिहासिक नाटक है। मगध, कोसल एवं कौशांबी के राजपरिवार और उनके उत्तराधिकार संबंधी घटनाओं पर यह नाटक आधारित है। पिता -पुत्र संबंध, राज-लालसा, स्त्री-स्वभाव का महत्व, सत्ता के लिए षड्यंत्र एवं भगवान बुद्ध का संवाद इस नाटक का कथा-विस्तार निर्धारित करता है।

अजातशत्रु का सत्तामोह में पिता बिम्बिसार को सत्ता से हटाना, कोसल एवं कौशांबी से युद्ध और पराजित हो पुनः पिता से माफी मांगना, यही मुख्यतः घटना-क्रम है। अंतर्द्वंद इस नाटक का मूलाधार है। मगध, कोसल एवं कौशांबी में प्रज्वलित विरोधाग्नि इस पूरे नाटक में फैली हुई है।

संवाद के बीच में काव्य का भी कलात्मक प्रयोग किया गया है। बुद्ध का संवाद सत्ता के इस नाटक में अलौकिक ठहराव और परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। असत्य और बुराई पर सत्य के विजय की गाथा एवं उत्साह और शौर्य से परिपूर्ण यह वीर-रस की एक प्रधान रचना है।
Profile Image for Pratyasha Nithin.
Author 6 books4 followers
March 6, 2019
जयशंकर प्रसाद जी का नाम तो बचपन में ही सुना था पर कभी उनकी रचनाएं पढने का अवसर ही नहीं मिला | अजातशत्रु बहुत ही रोचक शैली में लिखा नाटक है | नाटक की भाषा, पात्रों की बातचीत की शैली आपको एक मंच के सामने बैठा देती है जहाँ बैठकर आप इस नाटक का आनंद उठा सकते हैं | इस नाटक पर बौद्ध शैली का गहरा प्रभाव है | दया और क्षमा जैसे गुणों पर विशेष ध्यान दिया गया है | नाटक में कुछ काव्य भी हैं जो मन को प्रभावित करने वाले हैं |
22 reviews11 followers
December 3, 2020
जय शंकर प्रसाद जी द्वारा लिखे गए इस नाटक में इतिहास को एक झलक है जो अजातशत्रु ओर महात्मा बुद्ध के समय से परिचित करवाता है। इस नाटक में बहुत से पात्रों का विवरण भी है, जो इतिहास में अपनी जगह नी बना पाएं। जब तक भारत का सही इतिहास सबके समक्ष नी आता, जयशंकर जी ये नाटक उनकी अच्छी झलक दे जातें हैं।
Profile Image for Elle.
163 reviews10 followers
Read
July 28, 2022
Bhai, kuch to baat hai apne desh ki literature mai.
231 reviews
November 28, 2023
nice play. some of the relationship between different characters are different when read otherwise.
Displaying 1 - 6 of 6 reviews