वो एक तिजोरीतोड़ था जिसकी मां ने बड़े चाव से उसका नाम जीता रखा था, लेकिन वो जिंदगी में कभी कुछ ना जीता, हमेशा हारा । वो जीत का सपना भी देखता था तो हार पहले दिखाई देती थी । ऐसा शख्स दस लाख की रकम का तलबगार था और उस रकम के आगे उसे अपनी दुनिया खत्म होती दिखाई देती थी । जीत सिंह का का पहला शाहकार ।
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
These were the words of one of my friend I convinced hard to read at least one SMP novel and he chose to read "Das Lakh".
Surprised and shocked I asked him, "why? Was it so bad?"
"No, no, it was so good and I was so happy to read Das Lakh that if I'll read a second SMP novel, I'll become his fan and 'll stop reading anything else."
But no one.......NO ONE can stop reading SMP, after reading only one........that's the magic of the writings of Surender Mohan Pathak, the greatest Hindi crime fiction and suspense - thriller writer ever.
Das Lakh is one of the best novels of Surender Mohan Pathak, and the debut novel of Jeet Singh which is one of the leading character he created. He is not well educated, but skilled, and willingly involves himself in crime, so that he can find his love.......whether his luck favors him to succeed in his endeavors.... something not very easy to be answered, even for his fate.
It is one of those novels which has spellbinding effect and has immense repeat value. A MUST READ.
Jeeta Singh the new protagonist introduced with this novel has made a mark in Pathak Sahab 's world of characters. A very different character from the already established one. He has no remorse for the crimes he does. He does not believe in good values as his upbringing is not a smooth one. But in a crime world how he holds his own and despite all flaws in his characters how the reader starts developing sympathy for him and can see his golden innerself can be realised by reading Jeeta's novels.
दस लाख पाठक साहब द्वारा लिखा गया एक बेहतरीन थ्रिलर उपन्यास हैं | जीतसिंह सीरीज, जो आगे चलकर पाठकों की चहेती सीरीज बनी, का ये पहला उपन्यास हैं |इसकी खासियत इसके मुख्य किरदार जीतसिंह की सुष्मिता नाम की लड़की के लिए दीवानगी हैं| एक ऐसा शख्स जो अपने से हर लिहाज़ से बेहतर लड़की से एकतरफा मोहब्बत करता हैं और उससे ही खुश है| जो अपनी मोहब्बत को हासिल करने की कोशिश तक नहीं करना चाहता क्यूँ की उसे अपनी औकात पता हैं| पर किस्मत उसे मौका देती हैं की अगर वो हिम्मत और हौसला दिखाए तो अपनी महबूबा को पा सकता हैं| सुष्मिता की बहन के इलाज के लिए 10 लाख रुपये तीन महीने में अगर वो जुटा पाता हैं तो उसकी मोहब्बत को मंजिल मयस्सर हो सकती हैं| सुष्मिता का वादा हैं की अगर वो ये कारनामा कर गुज़रे तो वो उसके पाँव धो धो के पीयेगी| एक जूनून के हवाले होकर जीतसिंह तीन महीने की मियाद पूरी होने से पहले ये असंभव काम पूरा करके दिखाता हैं| पर किस्मत की सितम ज़रीफी का आलम ये हैं की धोखा उसे फिर भी मिलता हैं| थ्रिल,सस्पेंस,एक्शन और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण हैं ये उपन्यास| पर इसकी खासियत ये हैं की जीतसिंह जैसे जरायम पेशा शख्स से भी पाठक वर्ग एक सहानुभूति महसूस करता हैं| कोई विरला ही शख्स होगा जिसके दिल में जीतसिंह का क्लाइमेक्स में किया हुआ रुदन सुनकर टीस ना उठी हो| "माँ ! ओ मेरी माँ ! क्यूँ..? क्यूँ तूने मेरा नाम जीता रखा...?"
इस उपन्यास का नाम आपको उतना मुतमुइन नहीं कर रहा होगा लेकिन जब आप इस उपन्यास में जीत सिंह के किरदार से मिलते हैं। तो आपकी आँखे बरबस ही भर जाती हैं। जीत सिंह की माँ ने उसका नाम जीता इसलिए रखा क्यूंकि उसे लगा की वह हमेशा जीतेगा। लेकिन जीत सिंह की किश्मत ने उसके साथ ऐसा खिलवाड़ किया की वह सब कुछ जीत कर भी आखिरी समय पर सब कुछ हार जाता था। जब अपनी प्रेमिका को पाने की कगार पर था तो उसकी प्रेमिका के पारिवारिक समस्याओं के द्वारा किस्मत ने जीत सिंह से बदला लिया। वो एक तालातोड़ था, बड़ी सी बड़ी तिजोरियां चुटकियों में तोडना उसे बखूबी आता था। अपने जीवन की बगिया बसाने के लिए उसने अपने मामूली काम को छोड़ दिया और पकड़ लिया उसने ऐसा रास्ता जिससे जल्दी से जल्दी पैसे कम सके। लेकिन इस काम में सफल हो जाने के बाद भी उसे अपनी साथियों की गद्दारी से मुह की खानी पड़ती थी।
जीत सिंह का चरित्र किसी बड़े माफिया डॉन सा नहीं है। वो तो बस किस्मत का मारा है। उसने अपने जीवन की शुरुआत फूलों के बगान सी करने की सोची थी लेकिन किस्मत ने उसे सिर्फ और सिर्फ कांटो की झाड़ियाँ ही दी। ऐसे इंसान की कहानी जो आदि से अंत तक आपको रोमांच और भावनाओ से अलग नहीं होने देती।