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अप्सरा

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Hindi
172

171 pages, Paperback

First published January 1, 2007

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About the author

निराला का जन्म बंगाल में मेदिनीपुर ज़िले के महिषादल गाँव में हुआ था। उनका पितृग्राम उत्तर प्रदेश का गढ़कोला (उन्नाव) है। उनके बचपन का नाम सूर्य कुमार था। बहुत छोटी आयु में ही उनकी माँ का निधन हो गया। निराला की विधिवत स्कूली शिक्षा नवीं कक्षा तक ही हुई। पत्नी की प्रेरणा से निराला की साहित्य और संगीत में रुचि पैदा हुई। सन्‌ १९१८ में उनकी पत्नी का देहांत हो गया और उसके बाद पिता, चाचा, चचेरे भाई एक-एक कर सब चल बसे। अंत में पुत्री सरोज की मृत्यु ने निराला को भीतर तक झकझोर दिया। अपने जीवन में निराला ने मृत्यु का जैसा साक्षात्कार किया था उसकी अभिव्यक्ति उनकी कई कविताओं में दिखाई देती है।

सन्‌ १९१६ में उन्होंने प्रसिद्ध कविता जूही की कली लिखी जिससे बाद में उनको बहुत प्रसिद्धि मिली और वे मुक्त छंद के प्रवर्तक भी माने गए। निराला सन्‌ १९२२ में रामकृष्ण मिशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका समन्वय के संपादन से जुड़े। सन १९२३-२४ में वे मतवाला के संपादक मंडल में शामिल हुए। वे जीवनभर पारिवारिक और आर्थिक कष्टों से जूझते रहे। अपने स्वाभिमानी स्वभाव के कारण निराला कहीं टिककर काम नहीं कर पाए। अंत में इलाहाबाद आकर रहे और वहीँ उनका देहांत हुआ।

छायावाद और हिंदी की स्वच्छंदतावादी कविता के प्रमुख आधार स्तंभ निराला का काव्य-संसार बहुत व्यापक है। उनमें भारतीय इतिहास, दर्शन और परंपरा का व्यापक बोध है और समकालीन जीवन के यथार्थ के विभिन्‍न पक्षों का चित्रण भी ।भावों और विचारों की जैसी विविधता, व्यापकता और गहराई निराला की कविताओं में मिलती है वैसी बहुत कम कवियों में है। उन्होंने भारतीय प्रकृति और संस्कृति के विभिन्‍न रूपों का गंभीर चित्रण अपने काव्य में किया है। भारतीय किसान जीवन से उनका लगाव उनकी अनेक कविताओं में व्यक्त हुआ है।

यद्यपि निराला मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं तथापि उन्होंने विभिन्‍न छंदों में भी कविताएँ लिखी हैं। उनके काव्य-संसार में काव्य-रूपों की भी विविधता है। एक ओर उन्होंने राम की शक्ति पूजा और तुलसीदास जैसी प्रबंधात्मक कविताएँ लिखीं तो दूसरी ओर प्रगीतों की भी रचना की। उन्होंने हिंदी भाषा में गज़लों की भी रचना की है। उनकी सामाजिक आलोचना व्यंग्य के रूप में उनकी कविताओं में जगह-जगह प्रकट हुई है।

निराला की काव्यभाषा के अनेक रूप और स्तर हैं! राम की शक्ति पूजा और तुलसीदास में तत्समप्रधान पदावली है तो शिक्षुक जैसी कविता में बोलचाल की भाषा का सुजनात्मक प्रयोग। भाषा का कसाव, शब्दों की सितव्ययिता और अर्थ की प्रधानता उनकी काव्य-धाषा की जानी-पहचानी विशेषताएँ हैं।

निराला की प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं-परिमल, गीतिका, अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, नए पत्ते, बेला, अर्चना, आराधना, गीतगुंज आदि। निराला ने कविता के अतिरिक्त कहानियाँ और उपन्यास भी लिखे। उनके उपन्यासों में बिल्लेसुर बकारिहा विशेष चर्चित हुआ।उनका संपूर्ण साहित्य निराला रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित हो चुका है।

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Displaying 1 - 3 of 3 reviews
Profile Image for Anjney Rai.
61 reviews
December 11, 2024
Based on pre independence love story between a musician and an activist prince and the cultural differences and traditional barriers between them.

Some ideas are similar to 'gora' by rabindranath tagore probably because both are bengali based
Enjoyed
Profile Image for Shaili Sharma.
12 reviews
May 3, 2018
इस में एक ऐसी प्रेम भावना जो अभिनय से शुरू होती हैं और विलेन भी है इस में, तो अपार रूप का वर्णन , और प्रेम कि चाह में कैसे अपने पेशे को छोड़ प्रेम को दुनिया से जितने की जंग है apsara....
Profile Image for VEDANT PANDEY.
13 reviews1 follower
April 3, 2023
अगर आप कला और साहित्य की प्रेमी/जिज्ञासु हैं, और एक कलाकार के अंदर चल रही कहानियों, तर्क वितर्कों, समझाइशों और ताबिश(तपन) को पढ़ना, और महसूस करना चाहते हैं तो इस उपन्यास को ढूंढकर पढ़िए ।
भाषा शुद्ध है, निराला के काव्य से अलंकृत है,
और पढ़ने के बाद आख्यान के कई संवाद आपके साथ रह जायेंगे ।
एक कलाकार के मन की बात किसी दूसरे कलाकर के माध्यम से कहने की एक सुलभ और सहज कोशिश है ।
Post script - भाषा क्लिष्ट है, समय(काल) भारत की आजादी के आस पास का है,
कहानी कुछ पाठकों को लंबी लगेगी(ऐसा मेरा अनुमान है)
अगर आप इस रिव्यू के बाद उपन्यास पढ़ेंगे तो इस रिव्यू का रिव्यू जरूर दें कमेंट्स में कि आपका क्या परिपेक्ष्य है ।
आपकी टिप्पणी का इंतजार रहेगा, धन्यवाद :⁠-⁠)
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