परमीत मेहरा को रंगीला राजा, मनचला, मजनू, छैला बाबू, रोमियो, कैसानोवा, प्लेब्वाय जैसे कई नामों से पुकारा जा सकता था लेकिन उसकी असल जात औकात पहचानने वाला कोई उसे लम्पट, शोहदा या औरतखोर ही कहता। इसी वजह से वीकएण्ड पर कार लेकर दिल्ली की सड़कों पर भटकना उसका पसंदीदा शगल था। फिर एक रोज उसे अपना मैच मिल गया और वो परमीत मेहरा से परमीत मेहरा मरहूम बन गया।
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
पर्सनली मुझे ये किताब बोरिंग लगी औऱ बिल्कुल पसंद नहीं आयी. कहानी में परमीत का मर्डर हो जाता है औऱ अगाशे नाम का डिटेक्टिव क़ातिल ढूंढने आ जाता है. ना तो प्लाट पसंद आया औऱ ना ही कोई भी किरदार 👎👎👎👎