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378 pages, Paperback
First published January 1, 1957
The book lovingly portrays the personal, cultural, socio-economic lives of the villagers, along with their political aspirations, their petty jealousies and rivalries. The author conveys accurately the village lore and myths, casteism, issues of land-possession and -redistribution; landlords and their interactions with farmers, tenants, ryots – and the use of bullies and mercenaries to carry out their nefarious designs.![]()
बुद्धि भ्रष्ट होने से आदमी सबकुछ कर सकता है। - जित्तन बाबू इज़ सफ्रिंग फ्रॉम सेक्सोलॉजीआ। मलेरा, फ़ाइलेरिया, डायरिया, पायरिया आदि रोगों से भी मारात्मक रोग है यह सेक्सोलौजिआ।This is how he gets his name
दुखांत नहीं दुखदाएंड। सुखान्त नहीं, सुखदायक। टेलीग्राम शब्द से बहुत चिढ़ते हैं - " नो-नो, इतना बड़ा नाम नहीं चेलगा। इसके लिए उपयुक्त है - ट्रा। टक्वा ट्रा, ट्रा-ट्रा !
मामा हर पोर्टेबल मशीन के लिए ढकनकल शब्द दे रहे हैं और टेप-रिकॉर्डर के लिए धुनफीताबंद!
सही नाम - विजयमल्लसिंह। सिंह को मामा ने सन उन्नीस सौ बीस में कतरकर फेंक दिया। तब लिखने लगे - व्ही. मल्ल .,म.म.। चूँकि भिम्मलकृत भानुमति पेटिका के एक भी प्रश्न के उत्तर नहीं दे सका कोई, एक साल तक प्रतीक्षा करने के बाद भिम्मल मामा ने अपने नाम के साथ महामहोपाध्याय जोड़ना शुरू कर दिया। संक्षेप में म.म.! व्ही. मल्ल .,म.म.। कालांतर में भिम्मल मां। वे किसी के मामा नहीं, कोई उनका भांजा नहीं।At the police station he has a prompt rejoinder
थाना के दारोगा साहब अंग्रज़ी में बोले - "प्लीज! टर्न हिम आउट जित्तन बाबू !"Here, in a moment of existential angst he has a question
"दारोगा साहब, में टर्नेबल नहीं।"
"हू मेड कोकोनट ! जहाँ पवन का गमन नहीं, रवि-शशि उगे न भानु - जो फल ब्रह्मा रचे नहीं सो अबला माँगत दान। व्हाट्स देट फ्रूट ? जायफल, काफल, श्रीफल, कटहल, कटहल-बड़हल, कटहल-बड़हल! हेक्सागन प्लस पेंटागन !"This example is of casteism overcoming benefits provided by Govt
डिस्टिरक्ट बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर परानपुर अस्पताल को बंद करा दिया है। भूमिहार डॉक्टर को राजपूतों ने मिलकर धमकी दी। कायस्थ डॉक्टर के खिलाफ दरखास्त दे गई है - पैसा लेकर भी दूसरी जातिवालों को बढ़िया दवा नहीं देता, और कायस्थों को मुफ्त में दवा और सुई देकर इलाज करता है।These are some more extract from this wonderful book
गाओं की दाल बंदी के ऊपर चढ़े करेले की भुजिया कमिटी के कढ़ाई में भूंजी जाती है न।Finally, meet the endearing Cocker Spaniel named मीत,
लुत्तो भी आजकल फर्स्ट बुक पढ़ता है, अर्जुनलाल के यहां जाकर -अ फैट कैट सैट ऑन दैट मैट। एक मोटी बिल्ली बैठी है उस चटाई पर।
लीला के मामू लीला को एक अंग्रज़ी बालबर की दुकान में ले गए। वहां सोडावाटर-लेमलेट से केश को धोया, बालबर ने।
"क्या, इसके पहले भी, किसी काल या युग में, आज की तरह अभाव-अभियोग और व्यर्थता के विलाप से सामाजिक वायुमंडल परिव्याप्त हुआ था?"
ताजमनी से पहले ही प्रफुल्ल मीत चुलबुलाता हुआ आया। ... निश्चय हे आज चाय के साथ पकोड़े आ रहे हैं। पकोड़े के लिए भी चोरी कर लेता है मीत, कभी-कभी।He has to face the ire of the villagers for his master’s perceived sins
पोसा कुत्ता सुवंशलाल को हल्का दिया! पूंछकट्टा गीदड़ कहीं का।I wonder why this book is not better known, its English translation is Tale of a Wasteland. I consider “Renu” to be superior to Premchand or any other Hindi writer…