Harishankar Parsai is best satire writer in Hindi. He has chronicled the pist independence Indian history in his satires.
He is brutal to everyone including himself.
या तूने मुझे कोई मालदार आदमी समझ लिया होगा। इधर कुछ मोटा हो गया हूँ। जॉकेट पहन लेता हूँ, तो किराने का व्यापारी लगता हूँ। शरीर ने धोखा दे दिया। पिछले साल मेरे पास दो तगड़े कसरती जवान आए। बोले, “हमारी व्यायामशाला का वार्षिकोत्सव है। उसमें आप प्रमुख अतिथि हों, ऐसी हमारी प्रार्थना है।” मैं बड़े पसोपेश में पड़ा। इन लोगों ने मुझे क्या समझ लिया है? लेखक और व्यायामशाला? मैं अगर मरियल लेखक होता तो क्या ये मुझे मुख्य अतिथि बनाते? मैं कुरते की आस्तीन चढ़ाकर जब निकलता हूँ, तब लगता है उस्ताद शागिर्दों को रियाज कराके नहा-धोकर बादाम ख़रीदने निकले हैं। मैंने उनसे कहा, “वीरो, यह गौरव दारासिंह या चन्दगीराम को दो। मैं बहुत तुच्छ हूँ।” वे नहीं माने और मुझे जाना पड़ा। इस शरीर ने मेरी क्या-क्या गत नहीं कराई। व्यायामशाला में भिजवाया और ज़ेब कटवाई। दोस्त, मैं तेरी बुद्धि की दाद देता हूँ। तूने मुझे समझ लिया। तू सेठ पर नहीं रीझा। तू जानता था कि सेठ के पास जाएगा तो वह तेरी ही ज़ेब काट लेगा। हम लेखक लोग मनुष्य के मन और चरित्र का अध्ययन करते हैं। पर तूने जैसा अध्ययन मेरा कर लिया वैसा मैं किसी पात्र का नहीं कर सका। असल में लेखक तुझे होना चाहिए और मुझे ज़ेबकट। न जाने कब से तू मेरे पीछे पड़ा था। तुझे याद होगा, मैं कंडक्टर और एक मुसाफ़िर के बीच का झगड़ा निपटा रहा था। तभी तूने समझ लिया होगा कि मेरी प्रकृति ऐसी है कि दूसरों के मामले में कूद पड़ता हूँ। तूने यह भी ताड़ लिया कि कोई कठिनाई बताए तो मैं मदद के लिए दौड़ पड़ता हूँ। तूने इसी दाँव से मुझे मारा। मुझे अब विश्वास हो गया कि दूसरे की मदद करना बड़ी बुरी आदत है। जिसे इसकी लत पड़ जाती है, उसकी ज़ेब कटती है। तुझे तो याद होगा ही कि तूने डिब्बे के उस कोने में खड़े होकर मुझे बुलाया था। मैंने देखा, तेरी आँखें लाल थीं। तू पागल-जैसा लग रहा था या गाँजा पिए लग रहा था। तूने कहा था, “इदर आओ, इदर आओ, बर्थ नहीं मिलता, सीट नहीं मिलता—हम परदेसी आदमी हैं।” तेरा यह दाँव चला नहीं। तू मुझे अलग ले जाकर लूटना चाहता था। पर पगले, उसमें छीना-झपटी होती। हो सकता था, तू गिरफ़्तार हो जाता। मैंने यह ख़तरा देख लिया था। इसीलिए मैं सीट से उठा नहीं और कहा, “कंडक्टर से बात करो।” तब तू मेरे पास आ गया और अपने हाथ मेरे कंधों पर रख दिए। तूने मेरी आँखों में भरपूर देखा।