फाकाकशी करते विमल को जब शान्ता ने एक आसरा, एक सहारा ऑफर किया तो विमल को लगा जैसे उसके अच्छे दिन वाले थे । लेकिन विमल नहीं जानता था कि शान्ता ने उसे आसरा नहीं दिया था बल्कि अपने लिये एक हथियार ढूंढा था । एक ऐसा हथियार जिसे चलाकर वो अपने सारे कष्ट दूर करना चाहती थी ।अपनी सैलाब जैसी जिंदगी में ठहराव तलाशते, अपने अतीत से शर्मिंदा, वर्तमान से आशंकित और भविष्य से आतंकित महानायक सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल उर्फ विमल की महागाथा का पहला और अविस्मरणीय अध्याय !
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
आज मैं - कथित विमल कुमार खन्ना - मुंबई वी टी की बैंच पर बैठा हुआ इतनी बड़ी दुनिया में एकदम तनहा इन्सान था जिसने दो दिन से खाना नहीं खाया था । “ए !” - मेरे कानों में एक अधिकारपूर्ण स्वर पड़ा । मैंने सिर उठाकर देखा । मेरे सामने एक कुर्ता-पाजामा और टोपीधारी, सूरत से गुजराती लगने वाला, लगभग पचास साल का, गोल-मटोल आदमी खड़ा था । उसकी पैनी दृष्टि मेरे चेहरे पर टिकी हुई थी । “फरमाइये ?” - मैं बोला । मैंने सिगरेट का आखिरी कश लगाकर उसे जमीन पर फेंक दिया । कई बार आदमी की जुबान से निकला एक इकलौता शब्द भी उसके दिल में झांकने का रास्ता बना देता है । शायद ऐसा ही कुछ मेरे बारे में उस गुजराती ने अनुभव किया । शायद उसे मुझसे ऐसे शिष्ट उत्तर की आशा नहीं थी । मैंने अगर उसकी ‘ए’ के बदले में ‘क्या मांगता है’ कहा होता तो सारा सिलसिला ज्यादा स्वाभाविक मालूम होता । उसके चेहरे पर थोड़ी नर्मी आ गई ।
“क्या बात हो गई, मैडम ?” - मैं चिन्तित स्वर में बोला - “आप बहुत घबराई हुई लग रही हैं !” “म...मैं.. मैं...” - वह पूर्ववत् कम्पित स्वर में बोली - “म... मुझे एक गिलास पानी पिलाओ ।” मैं झपटकर किचन में गया और पानी ले आया । शान्ता गटागट पानी पी गई । उसने खाली गिलास मुझे थमा दिया । वह भयभीत थी और अपने से बेखबर थी । उसका रेशमी गाउन सामने से खुल गया था और भीतर से जाली जैसे पारदर्शक कपड़े से ढका उसका गोरा, पुष्ट शरीर झलक रहा था । “क्या बात हो गई, मैडम ?” - उसके लगभग नग्न शरीर से निगाहें चुराते हुए मैंने अपना प्रश्न दोहराया । “विमल !” - वह कम्पित स्वर में बोली और उसने सहारे के लिए अपना हाथ मेरी ओर बढ़ा दिया । किसी अज्ञात भावना से प्रेरित होकर मैं आगे बढ़ा और मैंने उसका हाथ थाम लिया । अगले ही क्षण वह मेरे आलिंगन में थी । मैं बौखला गया । मैंने पीछे हटना चाहा । उसका शरीर लता की तरह मेरे शरीर से लिपट गया । उसके नेत्र बन्द थे और वह होंठों में बुदबुदा रही थी -“विमल... विमल.. म.. मुझे डर लग रहा है ।” “लेकिन हुआ क्या है, मैडम ! आप क्यों डर रही हैं ?” - मैं उसे अपने शरीर से अलग करने का उपक्रम करता हुआ बोला । उसका शरीर एक बार कांपा, एक बार कसकर मेरे शरीर के साथ चिपका और फिर मुझसे अलग हो गया । वह पलंग पर जा बैठी और हांफने लगी । मुझे लगा कि वह धीरे-धीरे स्वयं को नियन्त्रित कर रही थी । मैं हक्का-बक्का-सा उसके सामने खड़ा रहा ।
Wow! I'm in awww of this book, the main protagonist and the author's writing style. This was my very first book by SMP and I finally get why are readers crazy for his mysterious world. It only took one book for me and I'm sold. So ultimately I've decided to read all the books in the Vimal series. And god help me because there are 44 books in total in this amazing and widely known series. I obviously recommend it.
पूरी कहानी विमल और शारदा के इर्द गिर्द घूमती हैं, ये बेहद छोटा उपन्यास हैं लेकिन थ्रील और रोमांच में कोई कमी नहीं. काफी समय बाद बढ़िया थ्रीलर पढ़ने को मिला हैं, अब तो विमल सीरीज पढ़नी ही पड़ेगी. Its a brilliant novel❤❤❤
Except for the scene where one character confesses loudly in a room, thinking that no one is listening, the book is entertaining, the plot twists keep you interested in the story.