“अल्फांसो साहब” - विमल झिझकता हुआ बोला - “मैं पहले भी कहना चाहता था कि क्या यह ज्यादा अच्छा नहीं होगा कि आप मेरा चुपचाप इस नगर से बाहर कहीं खिसक जाने का इन्तजाम कर दें ?” “नहीं ।” - अल्फांसो कठोर स्वर में बोला - “यह ज्यादा अच्छा नहीं होगा । और तुम खुद भी ऐसी कोई कोशिश भी मत करना । तुम यहां से खिसक गए तो कोई यह नहीं मानेगा कि तुम अपनी मर्जी से यहां से गए हो । हर कोई यही समझेगा कि मैं नारंग के चमचों से डर गया और मैंने तुम्हें चुपचाप यहां से भगा दिया । एक बार यहां के लोगों में यह धारणा बन गई कि अल्फांसो डर सकता है तो एल्बुर्क्क तो शेर हो ही जायेगा, छोटे- मोटे मच्छर, चूहे भी मेरे खिलाफ सिर उठाने लगेंगे । इस नगर पर मेरा एक विशेष प्रकार का दबदबा है । मैं उस पर हर्फ आता नहीं देख सकता । इसलिए ऐसी हरकत भूलकर भी मत करना ।” विमल चुप रहा । “यह सिद्धांत की बात है । अब अपनी नाक ऊंची रखने के लिए मुझे तुम्हारी हिफाजत करनी होगी, चाहे यह बात मुझे पसन्द आये या ना आये । मुझे किसी भी मामले में एक बार नीचा देखना पड़ गया तो फिर नारंग तो क्या एल्बुर्क्क ही मुझे हड़प जायेगा । तब या तो मुझे उसका प्रभुत्व स्वीकार करना पड़ेगा और या फिर इस नगर से मुझे अपना बोरिया बिस्तर लपेटकर कूच कर जाना पड़ेगा । मिस्टर, मुझे ये दोनों ही काम पसन्द नहीं ।”
एल्बुर्क्क कुछ क्षण चुप रहा और फिर परेशान स्वर में बोला - “अल्फांसो, क्यों उस मामूली छोकरे की वजह से खुद भीतर बाहर हो रहे हो और मुझे भी तबाह कर रहे हो ? तुम समझते क्यों नहीं ? नारंग उस छोकरे को किसी हालत में नहीं छोड़ेगा । वह उसकी जान का खतरा है ।” “क्यों एक ही बात को बार-बार दोहरा रहे हो ?” “इसलिए कि वह तुम्हारी मोटी अक्ल में घुस सके अल्फांसो मेरे बाप, नारंग ने मुझे अल्टीमेटम दिया हुआ है कि अगर मैंने उस छोकरे को पकड़कर उसके हवाले नहीं किया तो वह गोवा से मेरा पत्ता काट देगा । एक बार गोवा पर उसने हाथ डाल दिया तो फिर तुम्हारा पत्ता अपने आप कट जाएगा । अपनी इस वाहियात-सी जिद के चक्कर में खुद तो डूब रहे हो, साथ में मुझे क्यों डुबो रहे हो ।” “तुम डूबो या तैरो, मेरी बला से । लेकिन जो तुम चाहते हो, वह नहीं हो सकता । वह छोकरा तुम्हारे हवाले नहीं हो सकता । चाहे इसके लिए तुम कोशिश करो, चाहे नारंग कोशिश करे, और चाहे सारे हिंदोस्तान के दादा इकट्ठे मिलकर कोशिश करें ।” “मैं तुम्हारा खाना खराब कर दूंगा ।” - एल्बुर्क्क टेलीफोन पर गला फाड़कर चिल्लाया । “तुम्हें ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा ।” - अल्फांसो शान्ति से बोला - “मैं कैसा करारा जवाब देने की क्षमता रखता हूं, इसका नमूना तुम कल देख चुके हो । भविष्य में भी तुम्हें ऐसे ही जवाब पेश किए जायेंगे । समझे एन्थोनी एल्बुर्क्क !” दूसरी ओर से भड़ाक से रिसीवर को क्रेडिल पर पटके जाने की आवाज आई । सम्बन्ध विच्छेद हो गया । अल्फांसो ने भी रिसीवर रख दिया । “अब ?” - विमल ने पूछा । “फिलहाल इन्तजार ।” - अल्फांसो बोला । “किस बात का ?” - अल्बर्टो बोला - “इस बार उसके सारी इमारत को ही बुनियाद से उखाड़ देने का ?” “देखते हैं क्या होता है ?” - अल्फांसो दार्शनिकतापूर्ण स्वर में बोला । तभी टेलीफोन की घंटी बजी । विमल ने हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठा लिया । “हल्लो !” - वह बोला । “मैं सुन्दरी तारापोरवाला बोल रही हूं ।” - दूसरी ओर से एक स्त्री का मधुर स्वर सुनाई दिया - “मिस्टर अल्फांसो हैं ?” एकाएक विमल के नेत्र फैल गए । उसने कसकर रिसीवर पकड़ लिया । अल्फांसो बड़ी गौर से उसका मुंह देख रहा था । “जी हां, हैं ।” - विमल कठिन स्वर में बोला - “जरा होल्ड कीजिए ।” - उसने माउथपीस को हाथ से ढक लिया और अल्फांसो से बोला - “सुन्दरी तारापोरवाला । वही औरत जो उस रात क्लब में चालीस हजार रुपये जीती थी और जिसे आप डोना पाला बीच छोड़ने गये थे ।” “जिसके यहां से लौटते समय ही आप पर यह घातक आक्रमण हुआ था ।” - अल्बर्टो ने याद दिलाया । “आई सी ।” - अल्फांसो बोला - “क्या चाहती है ?” “मैंने पूछा नहीं । लेकिन अल्फांसो साहब...” “हां, हां ।” “अब मैं इस औरत को पहचान गया हूं । मैंने शुरु में ही कहा था कि इसमें कोई ऐसी बात है जो मेरी जानी-पहचानी है । इसमें जानी-पहचानी बात इसकी आवाज ही थी जो मैं पहले भी सुन चुका हूं । पहले भी यह आवाज मैंने टेलीफोन पर सुनी थी इसलिए प्रत्यक्ष में आवाज सुन चुकने के बाद मेरे कानों में खतरे की घंटियां तो बजने लगी थीं लेकिन मुझे कोई निर्णयात्मक बात नहीं सूझी थी । आज इसकी फोन पर आवाज सुनते ही मैंने इसे झट पहचान लिया है !” “कौन है ये ?” - अल्फांसो ने उत्सुक स्वर में पूछा । “यह वही औरत है जिसने त्रिलोकीनाथ की हत्या की अगली सुबह त्रिलोकीनाथ के दफ्तर में फोन करके मुझसे पूछा था कि क्या मैंने त्रिलोकीनाथ के किसी लिखित बयान पर हस्ताक्षर किए थे और क्या मैंने हस्ताक्षर करने से पहले उस बयान को अच्छी तरह पढ़ा था । अल्फांसो साहब, मैं इस आवाज को जिंदगी भर नहीं भूल सकता । इसी की वजह से तो मुझे बम्बई से पलायन करना पड़ा था ।”
तीनों के हाथों में रिवॉल्वरें थीं । विमल ने देखा नारंग के हाथ में उसकी रिवॉल्वर थी - वह रिवॉल्वर जो सुन्दरी उसके कोट की जेब में रखकर ले गई थी और जिसमें खाली गोलियां भरी हुई थीं । “क्यों बेटा ?” - नारंग क्रूर स्वर में बोला - “पहचाना अपने बाप को ?” “जी हां, पिताजी” - विमल शान्त स्वर में बोला - “पहचाना । लेकिन ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि आपने भी अपने लड़के को पहचान लिया ।” “हरामजादा” - नारंग मुंह बिगाड़कर बोला - “मसखरी मार रहा है । जानता नहीं सिर पर मौत खड़ी है ।” “मैं निकालता हूं इसकी मसखरी ।” - रणजीत गुर्राया । “नहीं ।” - नारांग ने अपने खाली हाथ से उसे आगे बढने से रोका - “अपने निजी दुश्मनों की मैं खुद खबर लेता हूं । इसका कल्याण मेरे हाथों होने दो ।” रणजीत एकदम पीछे हट गया । “बेटा” - नारंग बोला - “मैं तुम्हारी अपनी रिवॉल्वर से ही तुझे परलोक भेजूंगा ।” विमल चुप रहा । नारंग ने रिवॉल्वर उसकी ओर तानी और बोला - “खुदा को मानता हो तो उसे याद कर ले ।” “बादशाहो” - विमल शान्ति से बोला - “खुदा को तो तुम याद कर लो ।” “उल्लू का पट्ठा !” - नारंग ने एक क्रूर अट्टाहास किया - “फिर मसखरी मार रहा है ।” उसने रिवॉल्वर का घोड़ा दबाया । एक हल्की सी खट की आवाज के अलावा कुछ भी न हुआ । विमल ने अपने हाथ को सामने करके उसे जोर का झटका दिया । कलाई के साथ बंधी नन्हीं रिवॉल्वर जैसे जादू के जोर उसके हाथ में आ गई । नारंग ने दो बार घोड़ा दबाया । भीतर से गोली न निकलती पाकर उसकी आंखें आतंक से फैल पड़ीं । इससे पहले रणजीत और मोटू को समझ भी आ पाता कि क्या हुआ था, विमल ने फायर किया । नारंग उससे मुश्किल से पांच फुट दूर खड़ा था । गोली सीधी उसकी आंखों के बीच माथे में घुस गई । विमल ने दूसरा फायर किया । दूसरी गोली रणजीत के गले में धंस गई । मोटू ने अपने आकार के लिहाज से बड़ी फुर्ती दिखाई । उसने एकदम दाईं ओर छलांग लगा दी और वह विमल की रिवॉल्वर से निकली तीसरी गोली का शिकार बनने से बच गया ।
मिरांडा मेज पर आगे को झुककर फिर बात करने लगा । विमल के पल्ले उसका कहा एक शब्द भी नहीं पड़ रहा था । वह आगे को सरक आया था और उसने अपनी कुर्सी सरकाकर एकदम मेज के साथ सटा दी थी । इस प्रकार उसकी कमर से नीचे का भाग मिरांडा को या इंस्पेक्टर को दिखाई नहीं दे रहा था । विमल बड़ी तल्लीनता से मिरांडा की बात सुनने का अभिनय करता रहा । उसने धीरे से कोट के बटन खोल लिए । फिर उसका दायां हाथ रिवॉल्वर के दस्ते पर सरक गया । उसने धीरे से रिवॉल्वर को पतलून की बैल्ट से खींच लिया और उसे अपनी जांघ के साथ सटा लिया । उसकी कनपटियों में खून बजने लगा । उसी क्षण वेटर वहां पहुंचा । मिरांडा ने एक क्षण के लिए बोलना बन्द कर दिया । वह वेटर की ओर आकर्षित हुआ । विमल ने बिजली की फुर्ती दिखाई । उसने बायें हाथ से मेज को एक तरफ धकेल दिया । उसका रिवॉल्वर वाला हाथ आगे को झपटा और रिवॉल्वर की नाल लगभग मिरांडा के माथे से जा लगी । इससे पहले कि हक्का-बक्का मिरांडा कुछ समझ पाता, उसका शरीर या मस्तिष्क कोई प्रतिक्रिया दिखा पाता, विमल ने घोड़ा दबा दिया । गोली मिरांडा के माथे में धंस गई । जब वह दूसरी तरफ से खोपड़ी को फाड़ती हुई पार निकली तो उसका भेजा, मांस के छोटे-छोटे लोथड़े और खून के छींटे समीप खड़े वेटर के सफेद कोट पर बिखर गए । विमल को मिरांडा की आंखों में जिन्दगी की रोशनी साफ बुझती दिखाई दी । वह समझ गया कि दूसरी गोली की जरूरत नहीं थी । सब कुछ केवल एक सैकेंड में हो गया था । फिर उसने तभी फुर्ती से रिवॉल्वर का रुख इंस्पेक्टर सोनवलकर की तरफ किया । इन्स्पेक्टर चेहरे पर हाहाकारी भाव लिए विमल को देख रहा था लेकिन वह भयभीत नहीं था । प्रत्यक्षत: उसे न इस बात का ज्ञान था और न विश्वास कि खुद उसके सिर पर जान का खतरा मंडरा रहा था । उसके एक हाथ में कांटे लगा लोबस्टर का टुकड़ा था और दूसरे में फेनी का गिलास । उसकी आंखों में ऐसा भाव था जैसे वह विमल से अपेक्षा कर रहा हो कि वह अभी रिवॉल्वर उसके सामने फेंक देगा और आत्मसमर्पण कर देगा और या फिर एक पुलिस अधिकारी के जलाल से दहशत खाकर वह वहां से भाग खड़ा होगा । विमल के होंठों पर एक विद्रुपपूर्ण मुस्कराहट उभरी और उसने रिवॉल्वर का घोड़ा दबा दिया । गोली इंस्पेक्टर की आंखों के नीचे नाक पर लगी और वह कुर्सी समेत पीछे को उलट गया । फिर विमल की निगाह बार की तरफ उठी । वहां मिरांडा का आदमी यूं जड़ हुआ खड़ा था जैसे उसे लकवा मार गया हो । विमल ने रिवॉल्वर उसकी तरफ लहराई तो उसने आतंकित भाव से अपने दोनों हाथ अपने सिर से ऊपर उठा दिए और उसकी तरफ पीठ फेर ली । खून के छींटों से लथपथ वर्दी वाला वेटर भय से बेहोश होकर फर्श पर ढेर हो गया । बार में मौत का सा सन्नाटा छाया हुआ था । कोई अपने स्थान से हिल नहीं रहा था । विमल ने अपनी रिवॉल्वर वाली बांह अपने जिस्म से समानान्तर करके नीचे झुकाई । उसने रिवॉल्वर अपनी उंगलियों से फिसल जाने दी । उसने देखा कि किसी को यह मालूम नहीं हुआ था कि उसने रिवॉल्वर गिरा दी थी ।