खूब सोच-समझ कर विचार करके जब विमल ने उस अपराध की रूपरेखा तैयार की थी तो वो नहीं जानता था कि किसी दूसरे के आदेश और निर्देश पर काम करने में और खुद योजना बनाकर उसे अमल में लाने में दिन-रात का अन्तर था । और जब तक विमल को यह बात समझ में आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी ।
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
सन १९८१, के दिसम्बर माह में पाठक साहब ने अपने प्रशंसकों को एक शानदार तोहफा दिया – “खाली वार”| “खाली वार” इससे पहले आये उपन्यास “असफल अभियान” का अगला भाग था| पाठक साहब ने पहली बार एक प्रायोगिक तौर पर विमल के सामने सुनील और प्रभुदयाल जैसे किरदार को उपन्यास में जगह दी| “खाली वार” की कहानी शुरू होती है “असफल अभियान” के अंत से जिसमे “विमल” नितिन मेहता का बहुरूप धरकर, जगमोहन,महेन्द्रनाथ और पोपली के साथ “सिडनी फोस्टर” नामक डिप्लोमेट का अपहरण करने में सफल हो जाते हैं| लेकिन, कहानी में जबरदस्त मोड़ तब आता है, जब महेन्द्रनाथ की बेवकूफियों के कारण, पीटर और चार्ली को इस राजनितिक अपहरण की खबर लग जाती है| सुनील भी अपनी कोशिशों से विमल के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेटा है| वहीँ होलिमा लिबरेशन के दगाबाजी के कारण और पीटर और चार्ली के अचानक आघात के कारण विमल घायल हो जाता है| लेकिन, यहाँ से पाठक साहब का असली जलाल शुरू होता है| एक ऐसा क्लाइमेक्स जिसको पढने के बाद कठोर से कठोर दिल वाला भी हिल जाए और उसकी आँखों से आंसू आ जाए| दोस्तों, आपसे और हमसे यह क्लाइमेक्स अब अछूता नहीं रहा है|
Ohhhh boy!!!! Seeing people do extremely stupid things and those Dominos cascading as trouble for Vimal was heartwrenching. Book 10 was literal continuation of book 9 like both books were originally one but divided just for numbers sake. Anyways, I'm still onn about my decision to read this series but have decided to take a brief hiatus for this year. And this was my last read of January 2022. 10 guzzled and 34 left to go. I recommend it.