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Vimal #18

किस्मत का खेल

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अनथक प्रयत्नों और अनगिनत जुर्मों के फलस्वरूप विमल एक नया चेहरा पाने में आखिरकार कामयाब तो हो गया, परन्तु क्या नया चेहरा पाकर विमल ने विधाता से नयी किस्मत भी लिखवा ली थी ? क्या विमल अपने प्रारब्ध से जीत सकता था या एक बार फिर उसकी किस्मत उसे कोई नया खेल दिखाने वाली थी ।

Mass Market Paperback

First published December 1, 1987

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About the author

Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.

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Displaying 1 - 2 of 2 reviews
Profile Image for Sameer Mehra.
237 reviews2 followers
September 22, 2022
5/5 stars

सीवर में चूहों का आंतक, जामवंतराव का बार-बार अलार्म कैसे बजा कहना फिर पुड़िआ खाना, रूपचंद का आत्महत्या करना, हेलगा का विमल पर विश्वास ना करना इस तरह की बहुत सी घटनाएं है जो इस उपन्यास को अल्टीमेट बनाती है. क़्या ही कहूँ जमन्वंतराव और सोलंकी के किरदार ने चार चाँद लगा दिए......

ज़ब विमल सोनपुर जाता है तो जैक और रिची जैसे पहलवानो से सीधा नहीं भिड़ना चाहिए था जबकि विमल के पास गन भी थी, उसका पहले ही उपयोग करता तो इतनी मशक्क़त नहीं करनी पड़ती... मैं थ्रीलर लवर्स को सौ प्रतिशत रिकमेंड करता हूँ 🤟🏽

Profile Image for Rajeev Roshan.
71 reviews14 followers
April 7, 2014
"किस्मत का खेल" विमल सीरीज का 18 वां उपन्यास था जो दिसम्बर 1987 में प्रकाशित हुआ था।
उपन्यास की कहानी तेज़-तर्रार और कई घटनाओं से भरी हुई थी।
नया चेहरा मिल जाने के पश्चात इस उपन्यास में विमल, जौहरी बाज़ार में डाका डालता है लेकिन नाकामयाब होता है।
फिर मुबारक अली द्वारा जौहरी बाजार में दंगा फैला कर कर्फ्यू लगाने से विमल का काम आसान हो जाता है। विमल जौहरी बाजार में डकैती करने में सफल हो जाता है।
लेकिन "किस्मत का खेल" ही कहिये की, इकबाल सिंह का आमना सामना विमल से हो जाता है।
लेकिन किस्मत ऐसी करवट लेती है की डॉ स्लेटर की housekeeper विमल की फाइल इकबाल सिंह को बेच देती है और उसे वह पोस्ट द्वारा भेजती है।
फिर विमल की जद्दोजहद शुरू हो जाती है अपने अतीत से छुटकारा पाने के लिए। उसकी अपने आप से फिर जंग छिड़ जाती है अपने नए चेहरे को बचाने में।
पढ़िए इस उपन्यास को जानिये विमल के इस कारनामे में भाग्य ने उसके साथ क्या खेल खेला।
क्या इकबाल सिंह को विमल के नए चेहरे की खबर लग पाएगी।
क्या विमल इकबाल सिंह की हस्ती मिटा सकेगा।
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