What do you think?


Thrillers #24
कागज की नाव
लल्लू उर्फ लालचन्द हजारे ने जब दो कड़क मवालियों की शागिर्दी पकड़ी थी तो उसे अपना भविष्य बहुत स्वर्णिम और उज्जवल लगता था । वो अनायास ही अमीर बनने, दौलत के पहाड़ पर बैठने के सपने देखने लगा था । काश कि वो जानता कि अपराध कागज की नाव की तरह होता है जो बहुत देर तक, बहुत दूर तक नहीं चल सकती ।
Mass Market Paperback
First published June 1, 1987
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
Ratings & Reviews
Friends & Following
Create a free account to discover what your friends think of this book!
Community Reviews
Displaying 1 - 4 of 4 reviews
February 12, 2013
एक बहुत ही दिलचस्प उपन्यास बम्बई के अंडरवर्ल्ड पर . एक हैरतंगेज़ कहानी एक ऐसे नौज़वान की जिसे सभी लल्लू समझते थे जिसने एक बैंक डकेती से अपने गंभीर आपराधिक जीवन की शुरआत की . जिसने एक वेश्या से दिल लगाने की कोशिश की और फिर उस दुनिया से किनारा करने की कोशिश की जहाँ आदमी अपनी मर्ज़ी से जाता है पर वापिस नहीं आ पाता. क्या वो अपने साथियों को छोड़ सका? इस उपन्यास का टाइटल इसकी कहानी खुद कहता है अपराध एक कागज़ की नाव है जो बहुत दूर तक नहीं चल सकती. मानवीय भावनाओं को उकेरती एक बहुत ही सशक्त रचना
February 3, 2020
This is a rather filmy novel from Pathak ji. Lallu is a gang member who is expert driver in robberies. He works for a mafia don who is evil. Crime does not pay nut will lallu get a second chance?
It's a nail biting thriller which moves at a fast pace.
It's a nail biting thriller which moves at a fast pace.
July 26, 2020
'कागज की नाव' सुरेन्द्र मोहन पाठक का लिखा थ्रिलर उपन्यास है जिसका प्रथम प्रकाशन सन 1987 में हुआ था।
उपन्यास आपका भरपूर मनोरंजन करता है। इसके किरदार आपके मन को छू लेते हैं और उनके सुख दुःख आपके सुख दुःख बन जाते हैं। उपन्यास में केवल एक ही कमी लगी। इस कमी का जिक्र मैंने ब्लॉग पोस्ट पर किया है।
वेस्टलैंड से प्रकाशित नये संस्करण में उपन्यास के अलावा एक छोटी पुलिस प्रोसीज़रल कहानी जुर्म का इकबाल भी है। यह कहानी भी रोचक है और आपको पसंद आयेगी।
उपन्यास और कहानी के प्रति मेरी विस्तृत राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
कागज की नाव
उपन्यास आपका भरपूर मनोरंजन करता है। इसके किरदार आपके मन को छू लेते हैं और उनके सुख दुःख आपके सुख दुःख बन जाते हैं। उपन्यास में केवल एक ही कमी लगी। इस कमी का जिक्र मैंने ब्लॉग पोस्ट पर किया है।
वेस्टलैंड से प्रकाशित नये संस्करण में उपन्यास के अलावा एक छोटी पुलिस प्रोसीज़रल कहानी जुर्म का इकबाल भी है। यह कहानी भी रोचक है और आपको पसंद आयेगी।
उपन्यास और कहानी के प्रति मेरी विस्तृत राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
कागज की नाव
August 23, 2013
An amazing insight into the Mumbai underworld.
Displaying 1 - 4 of 4 reviews





