What do you think?


Sunil #8
शैतान की मौत
आरती भंडारी की मां उसके लिये अपनी सारी सम्पत्ति एक ऐसे ट्रस्ट के रूप में छोड़ कर मरी थी जिसका कि उसके इक्कीस साल के होने पर उसके कंट्रोल में आने का प्रावधान था । फिर ज्यों ही ट्रस्ट का संचालन आरती के काबू में आया, उसमें से कुछ निश्चित रकम गायब होने लगी जिसके बारे में उसके पिता का खयाल था कि उसे कोई शैतान ब्लैकमेल कर रहा था ।
Mass Market Paperback
First published May 1, 1966
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
Ratings & Reviews
Friends & Following
Create a free account to discover what your friends think of this book!
Community Reviews
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
December 5, 2025
शैतान की मौत.....पारम्परिक..... अनुमानित
मुख्य पात्र: सुनील, रमाकांत,प्रभु,कांस्टेबल पाल, वकील चाटर्जी,भंडारी, रत्ना,आरती, डॉक्टर कश्यप-मनहोर, रेशपशनिस्ट सरिता,मरीज चमनलाल,रोशनलाल -हरीश
तो भंडारी.. रामकांत का दोस्त जिसकी 25 की पत्नी रत्ना , रत्न का भाई हरीश, बीबीसे दो साल छोटी लड़की आरती -के घर इसलिए बुलाता हैं की उसके अकाउंट से 40 हजार रूपये दो मुस्तो में गायब हुए थे, और उसे डर था उसे कोई ब्लैकमेल कर रहा था!शायद रोशन लाल -जिसके नाम दो चेक थे, जिसकी बैंक में गवाही डॉक्टर कश्यप ने दीं थी!
आरती सुनील को चुपके से -खिड़की से एक रात इम्परियल होटल जाती मिलती हैं जाहाँ वह रोशन लाल के साथ एक और चेक के साथ मिलती हैं, जब सुनील बगल के कमरे में ठहरा -दिवार में सुराख़ कर -देख रहा वहाँ पहुँचता हैं तो, आरती जा चुकी थी, रोशनलाल की लाश पड़ी थी, सुनील चेक नीकल लेता हैं वापसी में -कमरे के बाहर बुढ़िया के नजर में आजाता हैं.
आरती अगले दिन बताती हैं की एक रात कॉटेल पार्टी से लौटेतें हुए अचानक एक आदमी उसके गाड़ी के सामने आ गया था तब डॉक्टर कश्यप ने घायल को उठाया था अपने पीछे क्लिनिक आने को कँहा -वह नहीं गई, भाग गयी!तब एक दिन रोशनलाल मिला -खुद को देतेंक्टिव बता हिट एंड रन केश में दोषी बता, छूटकारा के तौर पर घायल के इलाज के 40 हाजर मांगे थे!
सुनील सारा सेटअप समझ चूका था आगे वह इसी सेटअप का अनुपालन करता हुआ डॉक्टर कश्यप और - रोगी - गिरोह से मिलता हैं जँहा 40 हजार की मांग उससे भी की जाती हैं.
सुनील राजनगर की वापसी में रास्ते में उतर जाता हैं, जँहा उसका रास्ते भर पीछा होने से होटल में ठहरता हैं जँहा उसकी मुलाक़ात भंडारी आरती से होती हैं जिन्हे आरती के अलमारी से रिवाल्वर हासिल हुई थी
आरती के मदद से पीछे करने वाला से छुटकारा पाता हैं तो...
आगे प्रभु दयाल के कहने पर सुनील को हाथकड़ी लगवा जाता हैं -इस में भी फाँसता हैं -लॉक उप में बंद नहीं होता
वह होटल रेशप्सनिस्ट - जो पैसे के लालच में पहुंची - 2000 का सौदा कर चूका था इसलिए -वह पहचाने से इंकार कार देती हैं की उस रात वह बगल के कमरे में थारा था, रोशन लाल के कमरे से भगा था.... बुढ़या का आता पाता नहीं.
नॉवेल के अंत कातिल का उजागर अजीब ढंग से हुआ हैं -अपनी जिद्द पर प्रभु दयाल -फिंगरप्राइट्स पेपर पर लेकर पहुंच था जो सुनील से मिलाने की कोसिस की, फिर हरीश से,
क़्या ये इतना आसान हैं?
ब्लैक मेल की कहानियाँ दूर से पहचान में अति हैं आरती की भी रत्ना की भी - जिसने भंडारी से सम्बन्ध स्थापित किये, बच्चा ठहराना -फिर शादी!हरीश रत्ना का प्रेमी होना
ये एक ऐसी नॉवेल हैं जो आईने की तरह साफ हैं मिस्ट्री बस इस बात की कौन हैं हालाकी नॉवेल का जोर इस पर हैं ही नहीं.
मुख्य पात्र: सुनील, रमाकांत,प्रभु,कांस्टेबल पाल, वकील चाटर्जी,भंडारी, रत्ना,आरती, डॉक्टर कश्यप-मनहोर, रेशपशनिस्ट सरिता,मरीज चमनलाल,रोशनलाल -हरीश
तो भंडारी.. रामकांत का दोस्त जिसकी 25 की पत्नी रत्ना , रत्न का भाई हरीश, बीबीसे दो साल छोटी लड़की आरती -के घर इसलिए बुलाता हैं की उसके अकाउंट से 40 हजार रूपये दो मुस्तो में गायब हुए थे, और उसे डर था उसे कोई ब्लैकमेल कर रहा था!शायद रोशन लाल -जिसके नाम दो चेक थे, जिसकी बैंक में गवाही डॉक्टर कश्यप ने दीं थी!
आरती सुनील को चुपके से -खिड़की से एक रात इम्परियल होटल जाती मिलती हैं जाहाँ वह रोशन लाल के साथ एक और चेक के साथ मिलती हैं, जब सुनील बगल के कमरे में ठहरा -दिवार में सुराख़ कर -देख रहा वहाँ पहुँचता हैं तो, आरती जा चुकी थी, रोशनलाल की लाश पड़ी थी, सुनील चेक नीकल लेता हैं वापसी में -कमरे के बाहर बुढ़िया के नजर में आजाता हैं.
आरती अगले दिन बताती हैं की एक रात कॉटेल पार्टी से लौटेतें हुए अचानक एक आदमी उसके गाड़ी के सामने आ गया था तब डॉक्टर कश्यप ने घायल को उठाया था अपने पीछे क्लिनिक आने को कँहा -वह नहीं गई, भाग गयी!तब एक दिन रोशनलाल मिला -खुद को देतेंक्टिव बता हिट एंड रन केश में दोषी बता, छूटकारा के तौर पर घायल के इलाज के 40 हाजर मांगे थे!
सुनील सारा सेटअप समझ चूका था आगे वह इसी सेटअप का अनुपालन करता हुआ डॉक्टर कश्यप और - रोगी - गिरोह से मिलता हैं जँहा 40 हजार की मांग उससे भी की जाती हैं.
सुनील राजनगर की वापसी में रास्ते में उतर जाता हैं, जँहा उसका रास्ते भर पीछा होने से होटल में ठहरता हैं जँहा उसकी मुलाक़ात भंडारी आरती से होती हैं जिन्हे आरती के अलमारी से रिवाल्वर हासिल हुई थी
आरती के मदद से पीछे करने वाला से छुटकारा पाता हैं तो...
आगे प्रभु दयाल के कहने पर सुनील को हाथकड़ी लगवा जाता हैं -इस में भी फाँसता हैं -लॉक उप में बंद नहीं होता
वह होटल रेशप्सनिस्ट - जो पैसे के लालच में पहुंची - 2000 का सौदा कर चूका था इसलिए -वह पहचाने से इंकार कार देती हैं की उस रात वह बगल के कमरे में थारा था, रोशन लाल के कमरे से भगा था.... बुढ़या का आता पाता नहीं.
नॉवेल के अंत कातिल का उजागर अजीब ढंग से हुआ हैं -अपनी जिद्द पर प्रभु दयाल -फिंगरप्राइट्स पेपर पर लेकर पहुंच था जो सुनील से मिलाने की कोसिस की, फिर हरीश से,
क़्या ये इतना आसान हैं?
ब्लैक मेल की कहानियाँ दूर से पहचान में अति हैं आरती की भी रत्ना की भी - जिसने भंडारी से सम्बन्ध स्थापित किये, बच्चा ठहराना -फिर शादी!हरीश रत्ना का प्रेमी होना
ये एक ऐसी नॉवेल हैं जो आईने की तरह साफ हैं मिस्ट्री बस इस बात की कौन हैं हालाकी नॉवेल का जोर इस पर हैं ही नहीं.
This entire review has been hidden because of spoilers.
August 17, 2019
Nice one
Very Nicely written novel by the writer. Suspense is maintained till the end of novel. One cannot left till the end of the story. Good one.
Very Nicely written novel by the writer. Suspense is maintained till the end of novel. One cannot left till the end of the story. Good one.
Displaying 1 - 2 of 2 reviews


