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Sunil #9

रिपोर्टर की हत्या

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ब्लास्ट के होनहार पत्रकार राजेश को जब विशालगढ़ के एक प्रमुख उद्योगपति - जो कि नैशनल बैंक के डायरेक्टर और सिटी क्लब के प्रेसीडेंट होने के साथ साथ आगामी आम चुनावों में लोकसभा के उम्मीदवार भी थे - के एक लड़की के साथ शराब पीकर गाड़ी चलाने के अपराध में पकड़े जाने की एक्सक्लूसिव खबर मिली तो उसकी खुशी का कोई पारावार न रहा । काश कि वो जानता होता कि इस खबर को छपवाने की उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी !

Mass Market Paperback

First published June 1, 1966

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About the author

Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.

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Community Reviews

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7 (7%)
1 star
6 (6%)
Displaying 1 - 6 of 6 reviews
Profile Image for Dev Shani.
70 reviews
December 11, 2025
3.5 स्टार
रिपोर्टर की हत्या.... क्यूँ?

मुख्य पात्र : सुनील, पर्मिला, रेणु, मलीक,राय,रमाकांत, राम सिंह, प्रभु,रामपाल,जंग बहादुर जेबी,उदयशंकर चोपड़ा,जुली/मरथा, मुरारीलाल/असलम, रामपाल, फ्रैंक,ललित c,राकेश -टॉमी मॉर्गन

दो धुरें हैं दिलचस्प हैं की दोनों अलग अलग चलकर साथ कैसे हो गए थे. टॉमी मॉर्गन बैंक से चोरी करता, बचता, भागते को जेबी बचाता हैं तो उसी रात ब्लास्ट के रिपोर्टर राकेश को मुरारीलाल संग जुली को प्रभु के सामने मामूली खरोच की एक्सीडेंट पर थाने में लाया गया हैं, जेब से बरामद बटुये से पाता चला की वह शहर का नामी आदमी उदयशंकर चोपडा था
खबर छपति हैं तो चोपडा सामने आता हैं और वह रात वाला नहीं था, वह असली चोपडा था उसकी जेब कटी थी उसके बटुए से चोर को चोपडा समझ लिया गया था
वह ब्लास्ट को -लड़कि के साथ होने की काबर, इमेज खराब का मोटा मुवाजा और माफीनामा मांगता हैं जिसपर मालिक त्यार तो होता नहीं राजेश को उसके पिछले कुकर्म खोदने को लगा देता हैं

जुल बॉक्स चालू था, एक रात चोपडा जुली के साथ दिखा था जँहा राकेश से उसकी बहस हुई.... फिर उसकी लाश मिली थी

जुल बॉक्स में डंका पड़ा -पांच लोग जिसमे एक की चार ही उंगली थी, राम पल बता हैं कि डंका में माइक के होल्डिंग -ब्लैकमेल कागजत चोरी गए थे, जिन्हे खोज निकलने का ऑफर वह नहीं लेता, कहानि दोनों छोर यही मिलते हैं
आगे सुनील बहुत आसानी से, फ्रैंक x अपारधी फ्रैंक,से चार अंगुली के बारे जानकरी, वंही बैठे टॉमी मॉर्गन का पीछा कर जेबी तक पहुंच जाता हैं आगे व चोपडा से मिलकर जान लेता हैं की जुल बॉक्स में प्रतिरक्षा मंत्रालय का ब्लू प्रिंट थे जो रामपाल के सेफ में रखा था जो चोरी चला गया था सुनील को जुली का मिलना बटुआ चोरी ब्लू प्रिंट चोरी सेटअप लगता हैं जिसमे जुली की इन्वॉलमेंत्व थी..
वह ललित करोनिकल अकबर जो उस रात राकेश के साथ मौजूद था से तस्वीर ले, रामसिंग से स्थापित करते हैं की मुरारी असलम जुली मरथा इंटरनेशनल जासूस थे,
जिनका मकसद देश का बलुप्रिंट चुराना था
आखिरी शोडाउन गोलिबारी से होता हैं जँहा टॉमी जेबी- असलम मारे जाते हैं तो इस गोलबारी में राकेश के कातिल को समक्ष रखा जाता हैं जो प्रभावहींन था
ये दूसरा नॉवेल था जँहा देश जासूस जैसी चीजों को एक्सपलोरे किया गया.होटल में खून के पृष्ठभूमि जुलबॉक्स रामपाल को वापस लाया गया ये पहली बार था की कोई करैक्टर वापस आया हो, कहानि का अंत एक्शन भरा होने से whodunnit का कॉन्सेप्ट कमजोर हो गया, बाकि बुक पठनीय है
This entire review has been hidden because of spoilers.
Profile Image for Ashwin Dongre.
342 reviews11 followers
July 4, 2017
The story of this book is based on Erle Stanley Gardner's The Case Of a the Forgotten Murder.
The story goes fine as long as it's based on the original story, that's about 54%of the book, then it turns to become a mere thriller. The story becomes linear and predictive, squeezing all fun out of the novel.
Once only read.
36 reviews
August 18, 2019
Very interesting

Very Nicely written novel by the writer. Suspense is maintained till the end of novel. One cannot left till the end of the story. Good one.
Displaying 1 - 6 of 6 reviews

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