अखिलेश शर्मा की कविताएँ शीर्षक ‘किश्तों में आदमी’ गुजरे वक़्त की दुनिया रचती हैं। ये कविताएँ हमें किताबों, डायरियों, बालमन, स्त्रीमन, मित्रता, नदी, पर्व और किसी नवीन कहानी से लेकर दिल्ली मेट्रो तथा बनारस तक की यात्रा कराती हैं और बनारस से इनका प्रेम एक अलग ही स्तर का है! वैसे एक कविता में यात्रा भी दर्ज हुई है जहाँ अखिलेश कहते हैं, "यात्रा अपनी जारी रखते हैं, ये ज़िदादिली हम बनाए रखते हैं।"
🍁यात्रा अपनी जारी रखते हुए, ये जिंदादिली हम बनाए रखते है। पुस्तक किश्तों में आदमी अखिलेश जी द्वारा लिखी उनकी पहली पुस्तक है, जो की एक 41 कविताओं का संग्रह है, पुस्तक @rajmangalpublishers से प्रकाशित है, और बहुत ही कम पन्नो में है जो केवल एक बैठक में पूरी की जा सकती है। किताब के शुरुआती पन्ने में लेखक का परिचय है जिसमें उन्होंने अपने लेखन के सफर के साथ साथ कई जगह घूमने का जिक्र भी किया है और अपना परिचय भी बहुत अच्छे से दिया है। लेखक की कई कविताएं, आलेख, कई पत्र-पत्रिकाओं, कई राज्यों की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों, पत्रिकाओं इत्यादि में प्रकाशित हुई है। 🌱"एक देश बारह दुनिया", और "नदी सिंदूरी "जैसी बहुचर्चित पुस्तकों के युवा लेखक शिरीष खरे ने पुस्तक के बारे में कुछ शब्द लिखे है, कविताएं हमें किताबों, डायरियों ,बालमन,मित्रता या किसी नई कहानी से लेकर दिल्ली मेट्रो और बनारस तक का सफर करती है। आगे अनुक्रमणिका है जिसमे अलग अलग कविताओं का नाम तथा कितने पन्नो में खत्म होती है लिखा है। बात करते है पुस्तक और कविताओं की तो, कही लेखक किताबों की बात करते है , तो कही अपनी कलम और अपनी कविताओं की। कही बचपन की तो कही नारी की। कही दिल्ली मेट्रो की , तो कही प्रकृति के पंच तत्वों की,कही होली तो कही मौसम, कही नदी तो कही मछली, कही शहर तो कही गांव का जिक्र किया, कही कहानी तो कही सवाल, कही वक्त का पहिया तो कही वक्त वक्त की बात, कही बनारस तो कही ख्वाब, कही पूर्णिमा तो कही हर रोज की रात, कही हिंदी दिवस पे चर्चा की है तो कही आजादी के अमृत महोत्सव पे, कही मिलने जुलने की तो कही बिछड़ने की भी बात करी है। अब आगे चलते है और कविताओं की बात करते है और अपनी पसंदीदा पंक्ति आप सभी के समक्ष रखते है। 🍁किताबों का क्या है, अब तो वो भी सुस्ताया करती है, पास से गुजरों तो दबी आवाज में बुलाया करती है। इस कविता के जरिए लेखक बताना चाहते है की हम कैसे किताबों से बहुत दूर निकल आए है, सोने से पहले किताबें पढ़ा करते थे और कई बार सीने से लगा सो जाया करते थे कैसे किताबों में गुलाब रख दोस्ती का इजहार किया करते थे, पर अब किताबें भी एक जगह पड़ी पड़ी सुस्ता सी गई है । 🍁बनारस:- मेरी प्रिय स्थानों में सबसे ऊपर की लिस्ट में आता है, और लेखक की भी, बनारस पे लिखी कविता की एक एक पंक्ति मुझे प्रिय है पर पूरी कविता लिखना थोड़ा मुश्किल है तो कुछ ही पंक्ति। ❤️बनारस के रस में काशी के कश में, वरुणा और अस्सी के तट में, दशाश्वमेध, तुलसी और हरिश्चंद्र की सीढ़ियों में, यहां के कई कई घाटों में, जीवन और मरण मानो जैसे मनता यहां त्योहारों में, हर्ष में उत्कर्ष में, विश्वनाथ और काल भैरव के द्वार में, मां अन्नपूर्णा के दरबार में, कलियुग के इस स्वर्ग में, मोक्ष के इस पथ में, खुद के संग गंगा किनारे मैं, शायद यही खोया रहना चाहता हूं मैं। 🍁आज होली है:- बहुत ही प्यारी कविता है, लेखक ने जिंदगी के कई रंगों की बात कही है चाहे दुख के हो सुख के हो दर्द के हो मुस्कुराहट के हो साथ के हो या बिछड़ने के। 🌱कोई किसी की वीरान जिंदगी में रंगो के बादल खींच ले आए तो होली है। 🍁कविता:- तुम बहुत कुछ कर सकते हो 🌱 तुम चाणक्य बन सिकंदर की, कुटिल चालों को गिरा सकते हो तुम परशुराम की भाती हर राजा का अस्तित्व ही मिटा सकते हो अर्जुन बन पितामह भीष्म को बाणो की सैया में लेटा सकते हो। 🍁कविता:- वक्त वक्त की बात है। 🌱 राम अब आने को है उसके अंदर का रावण अब जलने को है ये तो वक्त की वक्त से की गई बात का अंश है एक कश है, एक आस है। 🍁बिना खोए खयालों में ऐसे बिना डूबे विचारों में ऐसे शब्दों के मोती कहां मिलते है नदी हो तुम, सागर हो गहराई पे जाकर ही तो अमृत कलश मिलते है। 🍁 आसमां छूने की ख्वाहिश मैं रखती हूं पैरो में न जाने कितनी जंजीरे बांध रखी है सब कुछ भूल फिर भी मुस्कुरा कर आगे बढ़ती हूं। हां मैं नारी हूं। 🍁शहर बसा कर लोग गांव ढूंढते है, हाथ में कुल्हाड़ी लेकर छाव ढूंढते है। 🍁 रूह को संभालना था तुम्हे पर तुम तो सूरत संवारने में लग गए। 🍁एक अरसे सा बीत गया बीन सोए जाते जाते मुड़ के देखा की आधा अधूरा सा सब रह गया। 🍁जिंदा रहने की कोई उम्र नहीं होती। 🍁हर कोशिश अवश्य ही सफलता देती है आज हमारा इम्तिहान तो कल उत्तर भी देती है। 🍁जिंदगी का कोई भरोसा नहीं प्रीत की बाढ़ में आज सब कुछ बह जाने दो। 🍁जीवन कभी एक समान नहीं रहता मौसम की तरह ये भी बदलता है कभी हरा भरा रहता तो कभी दूर दूर तक रेगिस्तान सा रहता। 🍁 बड़े अजीब है तरीके यहां रिश्ते निभाने के एक हाथ में गुलाब और दूजे में खंजर देखा है। अब यही कविताओं को खत्म करते है, आगे लेखक ने और भी दिलचस्प कविताएं लिखी है, जैसे की"हिंदी दिवस" "लो आ गई दिवाली" मिलना जुलना और बिछड़ना" "शरद पूर्णिमा" "जिंदगी" 🍁 "हमारी आजादी का अमृत महोत्सव" जिसमे लेखक ने बेरोजगारी की मार और जनमानस की परेशानी का जिक्र किया है। अब इसे ज्यादा लंबा न ले जाकर यही समाप्त करते है। आप कविताओं का सोख रखते है तो इस पुस्तक को जरूर से जरूर पढ़े और अगर न भी रखते है फिर भी पढ़े बहुत अच्छी प्यारी दुनिया दारी और जिंदगी में पल पल आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलती है इन कविताओं से। धन्यवाद🙏 अमीषा❤️