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Sunil #47
सिन्हा मर्डर केस
किसी मर्डर केस के इकलौते चश्मदीद गवाह के एकाएक स्वर्गवासी हो जाने का मतलब था कि हत्यारा अब हवा की तरह आजाद था और अब उसे पकड़े जाने पर भी उसे सजा नहीं दिलवाई जा सकती थी । ऐन ऐसा ही होता अगरचे कि केस में ‘ब्लास्ट’ का चीफ रिपोर्टर सुनील कुमार चक्रवर्ती दख्लअन्दाज न हुआ होता ।
Mass Market Paperback
First published May 1, 1973
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
May 7, 2020
एक बात माननी पड़ेगी, इस कहानी का प्लॉट जलेबी की तरह सीधा है। कहानी में कई मोड़ और घुमाव आते है।
कहानी अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ती है। यहां यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ और जो सच भी बोल रहा है वो कितना सच बोल रहा है और क्या छिपा रहा है?
इस कहानी में एक से ज्यादा किरदारों के पास मर्डर करने का मोटिव था, इसके कारण कहानी और दिलचस्प और रहस्यमई बनती जाती है।
लेकिन इस में भी कहानी का क्लाइमेक्स हल्का हो गया। कहानी के क्लाइमेक्स पर और बढ़िया काम हो सकता था।
मेरी रेटिंग: * * * *
कहानी अच्छी रफ्तार से आगे बढ़ती है। यहां यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ और जो सच भी बोल रहा है वो कितना सच बोल रहा है और क्या छिपा रहा है?
इस कहानी में एक से ज्यादा किरदारों के पास मर्डर करने का मोटिव था, इसके कारण कहानी और दिलचस्प और रहस्यमई बनती जाती है।
लेकिन इस में भी कहानी का क्लाइमेक्स हल्का हो गया। कहानी के क्लाइमेक्स पर और बढ़िया काम हो सकता था।
मेरी रेटिंग: * * * *
August 23, 2013
Another gem of a mystery by Pathak Saab. This is one story which one can not put down till the end.
Displaying 1 - 2 of 2 reviews



