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Sunil #55
डबल मिशन
कांसे की बनी हुई, तकरीबन एक हजार साल पुरानी नटराज की एक प्रतिमा देश के संग्रहालय से चोरी चली गई । लेकिन इस बहुमूल्य प्रतिमा के साथ-साथ ही चोरी चले गये थे देश के एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान से सम्बंधित रहस्य । और अब सुनील का मिशन - डबल मिशन - था उन दोनों चीजों को ढूंढ निकालना ।
Mass Market Paperback
First published July 1, 1975
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 1 of 1 review
August 1, 2022
2/5 stars
कहानी की शुरुआत और कांसेप्ट बहुत ही शानदार था, सुनील और गौरव का नटराज की मूर्ति और माइक्रोफिल्म ढूंढने जाना वाक़ई रोचक था. पर जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती हैं तो कई जगह पटरी से उतरती हुई प्रतीत होती हैं.... अकेले कुरैशी ने सबकी हालत टाइट करदी, कुरैशी नहीं होता तो कहानी पूरा पढ़ना मुश्किल हो जाता.
मुझे तो रोमांच और थ्रील की भारी कमी लगी, एक तरह से कहानी predictable थी जिससे मैं उतना लुत्फ़ नहीं उठा पाया जितना उठाना चाहिए था.
कहानी की शुरुआत और कांसेप्ट बहुत ही शानदार था, सुनील और गौरव का नटराज की मूर्ति और माइक्रोफिल्म ढूंढने जाना वाक़ई रोचक था. पर जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती हैं तो कई जगह पटरी से उतरती हुई प्रतीत होती हैं.... अकेले कुरैशी ने सबकी हालत टाइट करदी, कुरैशी नहीं होता तो कहानी पूरा पढ़ना मुश्किल हो जाता.
मुझे तो रोमांच और थ्रील की भारी कमी लगी, एक तरह से कहानी predictable थी जिससे मैं उतना लुत्फ़ नहीं उठा पाया जितना उठाना चाहिए था.
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