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Sunil #78
नौ जुलाई की रात
एक अत्यन्त रहस्यमयी रात की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी । ऐसा क्या हुआ था उस रात को जिसकी नगर के बड़े इज्जतदार और सम्भ्रान्त आदमी लीपापोती करने की कोशिश कर रहे थे । हर कोई यही साबित करने की कोशिश कर रहा था कि जो गोली की आवाज उस रात सुनी गई थी, वह वास्तव में शैम्पेन का कॉर्क उड़ने की आवाज थी !
Mass Market Paperback
First published January 1, 1980
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 3 of 3 reviews
January 23, 2018
This is an adaption of the novel "The D.A. Takes a ChanceThe D.A. Takes a Chance" written by Erle Stanley Gardner,
Someone reports a shot had been fired at a party over a week ago to The Blast, Sunil begin investigation, while at first everyone says there was no murder, soon they start saying it was accident, and then again another murder happens.
Its a good mystery all in all, but you kind of see how it was done and by who.
Someone reports a shot had been fired at a party over a week ago to The Blast, Sunil begin investigation, while at first everyone says there was no murder, soon they start saying it was accident, and then again another murder happens.
Its a good mystery all in all, but you kind of see how it was done and by who.
March 16, 2021
Two similar knives or can we say eight similar knives? The plot is little improbable. Who commits suicide by stabbing themselves? Did someone hear the bullet fired or not?
This is one of weak novels of Sunil and SMP.
वह कान्ता के फ्लैट पर पहुंचा । उसने कॉलबैल बजाई । दरवाजा अर्जुन ने खोला । “तुम !” - सुनील बोला - “तुम यहां क्या कर रहे हो ?” “गुरुजी” - अर्जुन जल्दी से बोला - “कान्ता ने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है ।”
“क्या ?” - सुनील हैरानी से बोला ।
“भीतर आइए ।” सुनील भीतर दाखिल हुआ । “आपके आदेश के अनुसार मैं यहां पहुंच गया था । पुलिस के आगमन तक मैं उसके फ्लैट से दूर ही रहा था । फिर वह पुलिस के ही साथ यहां से कहीं चली गई थी । जब वह वापिस आई थी तो भी मैं थोड़ी देर यही सूंघने की कोशिश करता रहा था कि कोई सादी वर्दी वाला पुलसिया उसकी निगरानी तो नहीं था तो मैं इमारत में घुसा था । मैंने कॉलबैल बजाई, कोई जवाब न मिला । मैंने दरवाजे पर दस्तक दी तो भी कोई जवाब नहीं मिला । मैंने दरवाजे को धक्का दिया तो वह खुल गया । उसका नाम लेकर उसे पुकारा तो भी जवाब नदारद । मैं हिम्मत करके भीतर दाखिल हुआ । गुरु जी, वह उस” - अर्जुन ने पिछली दीवार में बने दो दरवाजों में से एक की तरफ संकेत किया - “बैडरूम में पड़ी थी । पलंग के समीप रखी मेज पर नींद की गोलियों की एक आधी खाली शीशी पड़ी थी । कुछ गोलियां मेज पर और मेज के पास फर्श पर गिरी भी दिखाई दे रही थीं । मैं फौरन समझ गया कि लड़की दस-पांच किलो नींद की गोलियां खा गई थी । नीचे ही सड़क पर एक डाक्टर का क्लीनिक मैंने देखा था । इत्तफाक से वह क्लीनिक पर मौजूद था । मैं भागकर उसे बुला लाया । गुरु जी, वक्त रहते डॉक्टर ने उसे सम्भाल लिया वर्ना लड़की तो टे बोल गई थी ।”
This is one of weak novels of Sunil and SMP.
वह कान्ता के फ्लैट पर पहुंचा । उसने कॉलबैल बजाई । दरवाजा अर्जुन ने खोला । “तुम !” - सुनील बोला - “तुम यहां क्या कर रहे हो ?” “गुरुजी” - अर्जुन जल्दी से बोला - “कान्ता ने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है ।”
“क्या ?” - सुनील हैरानी से बोला ।
“भीतर आइए ।” सुनील भीतर दाखिल हुआ । “आपके आदेश के अनुसार मैं यहां पहुंच गया था । पुलिस के आगमन तक मैं उसके फ्लैट से दूर ही रहा था । फिर वह पुलिस के ही साथ यहां से कहीं चली गई थी । जब वह वापिस आई थी तो भी मैं थोड़ी देर यही सूंघने की कोशिश करता रहा था कि कोई सादी वर्दी वाला पुलसिया उसकी निगरानी तो नहीं था तो मैं इमारत में घुसा था । मैंने कॉलबैल बजाई, कोई जवाब न मिला । मैंने दरवाजे पर दस्तक दी तो भी कोई जवाब नहीं मिला । मैंने दरवाजे को धक्का दिया तो वह खुल गया । उसका नाम लेकर उसे पुकारा तो भी जवाब नदारद । मैं हिम्मत करके भीतर दाखिल हुआ । गुरु जी, वह उस” - अर्जुन ने पिछली दीवार में बने दो दरवाजों में से एक की तरफ संकेत किया - “बैडरूम में पड़ी थी । पलंग के समीप रखी मेज पर नींद की गोलियों की एक आधी खाली शीशी पड़ी थी । कुछ गोलियां मेज पर और मेज के पास फर्श पर गिरी भी दिखाई दे रही थीं । मैं फौरन समझ गया कि लड़की दस-पांच किलो नींद की गोलियां खा गई थी । नीचे ही सड़क पर एक डाक्टर का क्लीनिक मैंने देखा था । इत्तफाक से वह क्लीनिक पर मौजूद था । मैं भागकर उसे बुला लाया । गुरु जी, वक्त रहते डॉक्टर ने उसे सम्भाल लिया वर्ना लड़की तो टे बोल गई थी ।”
January 31, 2022
excellent
Well written as always. Pathak creates the suspense and maintains it. Mahant remains a continuous villainous character. Sunil is evergreen.
Well written as always. Pathak creates the suspense and maintains it. Mahant remains a continuous villainous character. Sunil is evergreen.
Displaying 1 - 3 of 3 reviews




