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Sunil #79
खाली कारतूस
अपने पिता को खोकर, सजनानी के इकलौते बेटे गोपी से अपने घनिष्ठ सम्बन्धों में आसरा तलाशती शीला, सजनानी के घर की बहू बनने का सपना देखा करती थी और खुद सजनानी भी उससे बहुत स्नेह भाव से पेश आता था । लेकिन फिर जब गोपी ने अचानक किसी और से शादी कर ली और शीला फिर भी सजनानी के लिये फिक्रमंद रही तो हर किसी ने सोचा कि वो अब बेटे को छोड़कर बाप से प्यार की पींगें बढाने लगी थी ।
Mass Market Paperback
First published February 1, 1980
About the author
Surender Mohan Pathak
335 books398 followersSurender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
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Community Reviews
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
March 21, 2021
3 similar guns created a lot of confusion and mystery in this murder of Mohanlal. Sajanani is a rich old man who wants Sheela As his daughter in law.
Again Sunil messes up with evidence which I don't like. Climax is abrupt too. Hence one star deducted.
“यह कहां आ गए आप ?” - गोपीनाथ हड़बड़ा कर बोला । सुनील ने इग्नीशन बन्द किया और बोला - “आओ ।” “आप कहीं मुझे शीला के फ्लैट पर तो नहीं ले जा रहे ?” “क्यों ? डरते हो वहां जाने से ?” “सवाल डरने का नहीं है । सुनील साहब । मेरी ताजी- जाती शादी हुई है । मैं नहीं चाहता कि...” “क्या नहीं चाहते तुम ?” “क्या वहां जाना जरूरी है ?” “हां ।” “ठीक है । चलिए ।” दोनों कार से बाहर निकले । सुनील ने कार को ताला लगा कर चाबियां वापिस गोपीनाथ को सौंप दीं । “तुमने बताया नहीं तुम क्या चाहते हो ?” “छोड़िए ।” दोनों इमारत में दाखिल हुए । सुनील ने फ्लैट नम्बर ग्यारह की घन्टी बजाई । गोपीनाथ झिझका- सा सुनील की ओट में खड़ा रहा । दरवाजा खुला । चौखट पर शीला प्रकट हुई । उसने सुनील को देखा । “हैल्लो, सुनील ।” - वह बोली । फिर उसकी निगाह गोपीनाथ पर पड़ी और वह सकपका कर चुप हो गई । गोपीनाथ ने बेचैनी से पहलू बदला । शीला ने अपने आपके सम्भाला और बोला - “हैल्लो गोपी ।” “हल्लो, देयर ।” - गोपीनाथ कठिन स्वर में बोला । “आओ ।” वे दोनों भीतर दाखिल हुए । शीला ने दरवाजा भीतर से बन्द कर दिया और उनके सामने जा बैठी । “शादी की बधाई हो गोपी ।” - शीला बोली । “थैंक्यू ।” - गोपीनाथ खोखले स्वर में बोला । “आप दोनों चुप करो और गौर से मेरी बात सुनो” - सुनील बोला - “शीला, सजनानी तुम्हारी हिफाजत के बारे में बहुत चिंतित है । इसलिए यह महसूस कर रहा है कि अपनी हिफाजत के लिए तुम्हारे पास कोई हथियार होना चाहिए ।” “मैं महसूस कर रहा हूं ।” - गोपीनाथ हड़बड़ा कर बोला ।
“शटअप” - सुनील बोला - “शीला को रिवाल्वर दो ।” गोपीनाथ ने हिचकिचाते हुए जेब से रिवाल्वर निकाली और उसे शीला की तरफ बढा दिया । “रिवाल्वर ले लो, शीला ।” - सुनील बोला ।
“मैं क्या करूं इसका ?” - शीला हड़बड़ाकर बोली । “ले लो । तकिए के नीचे रखने के काम आएगी ।” “इसमें से एक गोली चली हुई है शीला” - गोपीनाथ बोला - “सुनील ने...” “गोपी” -
सुनील बीच में बोल पड़ा - “तुम चुप ही रहो तो अच्छा है ।” गोपीनाथ ने दांत भींच लिए ।
Again Sunil messes up with evidence which I don't like. Climax is abrupt too. Hence one star deducted.
“यह कहां आ गए आप ?” - गोपीनाथ हड़बड़ा कर बोला । सुनील ने इग्नीशन बन्द किया और बोला - “आओ ।” “आप कहीं मुझे शीला के फ्लैट पर तो नहीं ले जा रहे ?” “क्यों ? डरते हो वहां जाने से ?” “सवाल डरने का नहीं है । सुनील साहब । मेरी ताजी- जाती शादी हुई है । मैं नहीं चाहता कि...” “क्या नहीं चाहते तुम ?” “क्या वहां जाना जरूरी है ?” “हां ।” “ठीक है । चलिए ।” दोनों कार से बाहर निकले । सुनील ने कार को ताला लगा कर चाबियां वापिस गोपीनाथ को सौंप दीं । “तुमने बताया नहीं तुम क्या चाहते हो ?” “छोड़िए ।” दोनों इमारत में दाखिल हुए । सुनील ने फ्लैट नम्बर ग्यारह की घन्टी बजाई । गोपीनाथ झिझका- सा सुनील की ओट में खड़ा रहा । दरवाजा खुला । चौखट पर शीला प्रकट हुई । उसने सुनील को देखा । “हैल्लो, सुनील ।” - वह बोली । फिर उसकी निगाह गोपीनाथ पर पड़ी और वह सकपका कर चुप हो गई । गोपीनाथ ने बेचैनी से पहलू बदला । शीला ने अपने आपके सम्भाला और बोला - “हैल्लो गोपी ।” “हल्लो, देयर ।” - गोपीनाथ कठिन स्वर में बोला । “आओ ।” वे दोनों भीतर दाखिल हुए । शीला ने दरवाजा भीतर से बन्द कर दिया और उनके सामने जा बैठी । “शादी की बधाई हो गोपी ।” - शीला बोली । “थैंक्यू ।” - गोपीनाथ खोखले स्वर में बोला । “आप दोनों चुप करो और गौर से मेरी बात सुनो” - सुनील बोला - “शीला, सजनानी तुम्हारी हिफाजत के बारे में बहुत चिंतित है । इसलिए यह महसूस कर रहा है कि अपनी हिफाजत के लिए तुम्हारे पास कोई हथियार होना चाहिए ।” “मैं महसूस कर रहा हूं ।” - गोपीनाथ हड़बड़ा कर बोला ।
“शटअप” - सुनील बोला - “शीला को रिवाल्वर दो ।” गोपीनाथ ने हिचकिचाते हुए जेब से रिवाल्वर निकाली और उसे शीला की तरफ बढा दिया । “रिवाल्वर ले लो, शीला ।” - सुनील बोला ।
“मैं क्या करूं इसका ?” - शीला हड़बड़ाकर बोली । “ले लो । तकिए के नीचे रखने के काम आएगी ।” “इसमें से एक गोली चली हुई है शीला” - गोपीनाथ बोला - “सुनील ने...” “गोपी” -
सुनील बीच में बोल पड़ा - “तुम चुप ही रहो तो अच्छा है ।” गोपीनाथ ने दांत भींच लिए ।
August 23, 2013
A mystery as twisted as a spider’s web. Great work by Pathak Sahab.
Displaying 1 - 2 of 2 reviews



