आप के मनोरंजन के लिए मैं फिर से हाजिर हूँ अपनी नवीनतम और 28 वीं रचना “कानून” ले कर।
“कानून” एक अलग श्रेणी में रखा जाने वाला अनोखा कथानक है। ये उपन्यास पढ़ते हुए आप को कानून की कुछ कमजोरियों का तो एहसास तो होगा ही, साथ ही आप को ये भी एहसास होगा कि कानून कितना मजबूत है और सब के लिए बराबर है।
आप इस कहानी में ये पढ़ेंगे कि शातिर लोग कानून की कुछ कमजोरियों का किस तरह से नाजायज फायदा उठाते हैं मगर हमेशा की तरह आखिरी जीत सच्चाई की ही होती है।
बुराई की आंशिक जीत के बाद सच्चाई की जीत तक के सफर का नाम है मेरी ये कहानी “कानून।”
कहानी का नायक एक चालीस वर्षीय तुषार हिरवानी नाम का वकील है जो कानून का सच्चा भक्त है। इस उपन्यास में आप की मुलाकात कानून की कमजोरियों का फायदा उठाने वाले कुछ शा&