आदिकाल से आधुनिक काल तक संपूर्ण मानवीय गतिविधियों का केंद्र जीवन को अधिक से अधिक सुखी बनाना रहा है।पर कुछ कारणोंवश मानव समाज सभ्यता के विकास की उस अवस्था तक पहुंच नहीं पाया है जिसमें स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण,एक व्यक्ति/समुदाय का दूसरे व्यक्ति/समुदाय के प्रति प्रेम-सहयोग की भावना,विकासात्मक राजनीति इत्यादि हों।यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं के विकास पर केंद्रित है। प्रस्तुत उपन्यास एक ऐसे युवक की कहानी है जिसने अपने जीवन में अन्याय,धोखे,पारिवारिक कलह,सांप्रदायिकता, बलात्कार,हिंसा, नक्सलवाद,आतंकवाद की घटनाएं देखी-सुनी। महापुरुषों समाज सुधारकों और वैज्ञानिकों की जीवनियों से प्रेरित होकर वह संपूर्ण मानव समाज में सुखद परिवर्तन लाने का दृढ़ संकल्प लेता है। फिर आगाज़ होता &#