Словно сама жизнь говорит со страниц "Тихого Дона". Запахи степи, свежесть вольного ветра, зной и стужа, живая речь людей - все это сливается в раздольную, неповторимую мелодию, поражающую трагической красотой и подлинностью. Разве можно забыть мятущегося в поисках правды Григория Мелехова? Его мучительный путь в пламени Гражданской войны, его пронзительную, неизбывную любовь к Аксинье, все изломы этой тяжелой и такой прекрасной судьбы?
Mikhail Aleksandrovich Sholokhov was awarded the 1965 Nobel Prize in Literature "for the artistic power and integrity with which, in his epic of the Don, he has given expression to a historic phase in the life of the Russian people."
بذارید اول از نکات مثبت بگم تا یادم نرفته. ترجمه ی احمد شاملو از این رمان، خیلی خوب بود. سومین ترجمه ایه که از شاملو می خونم (دو تای قبلی: گیل گمش و شازده کوچولو) و دارم مطمئن می شم که یکی از مترجم های واقعاً خوب ماست. کتاب رو نه لفظ به لفظ، بلکه مضمون به مضمون ترجمه کرده بود. یعنی گشته بود مضمون معادل اون حرف هایی که اونا می زنن، توی اصطلاحات و ضرب المثل های فارسی پیدا کرده بود و به جای اصطلاحات فرانسوی و روسی، از اصطلاحات فارسی استفاده کرده بود. در نتیجه، شما بیشتر احساس می کردید که دارید کتابی از مثلاً جلال آل احمد می خونید، نه میخاییل شولوخوف. البته یه کم توی استفاده از ضرب المثل ها زیاده روی کرده بود و مثلاً هر کس توی هر جمله ای که به کار می برد، دو سه تا ضرب المثل می آورد، در حالی که در زندگی واقعی ما اینقدر از ضرب المثل استفاده نمی کنیم.
اما نکات منفی. توی ویکی پدیا این کتاب رو با "جنگ و صلح" مقایسه کرده بود و گفته بود همون طور که جنگ و صلح تلفیقی از جنگ و زندگی عادی مردمه، این هم همینطوره. اما جدای از این شباهت، هیچ شباهت دیگه ای به هم ندارن و این کتاب راه صد ساله ای داره تا به گرد جنگ و صلح برسه. اول این که جنگ و صلح، مضمون و درونمایه داشت، این رمان اگر هم بشه براش درونمایه ای پیدا کرد، خیلی مبهمه و تا آخر کتاب هم به نتیجه ای نمی رسه. "کنت پیر بزوخوف" توی جنگ و صلح، دنبال یه چیزیه (مفهوم زندگی) که در آخر رمان بهش می رسه، اما "گریگوری ملخوف" توی دن آرام، شک و تردید و دو دلی بین کمونیست بودن و نبودن رو تا آخر کتاب حفظ می کنه و اصلاً دنبالش نمی ره که به جوابی برسه. پیوسته از جبهه ی سرخ ها به جبهه ی سلطنت طلب ها می ره و برمیگ رده، ولی به هیچ نتیجه ای نمی رسه.
دوم این که جنگی که جنگ و صلح حولش نوشته شده بود، یکی از جنگ های بزرگ بود و یک طرفش ناپلئون و طرف دیگه اش تزار الکساندر بود و فتح مسکو و سوختن مسکو و اتفاق های بزرگ دیگه. اما جنگ این کتاب، فقط شورش قسمت هایی از منطقه ی "دُن" علیه شوروی بود. پس از اساس خواننده ی غیر روسی از وجود این جنگ مطلع نیست، چه برسه به این که علاقه داشته باشه راجع بهش اطلاعاتی کسب کنه.
در نتیجه، سوم: این که بخش بسیار زیادی از کتاب پر بود از شرح و توضیح پیشروی ها و عقب نشینی ها و تفصیل عملیات های این جنگ. انگار یه کتاب تاریخی-نظامی نوشته بود و نه رمان. در حالی که اصل جنگ هم برای خواننده ی غیر روس هیچ اهمیتی نداشت. جنگ و صلح هم چند فصل منحصراً به شرح جنگ و توضیح کارهای فرمانده "کوتوزوف" پرداخته بود که اون ها هم راحت می تونست از جنگ و صلح حذف شه.
چهارم. پس از پایان رمان، احساس بیهودگی به آدم دست می داد. زندگی های مختلفی رو با شور و حرارت دنبال کردی، بدون این که هیچ کودوم به نتیجه ای برسه. تقریباً همه ی افراد خانواده ی ملخوف بدون هیچ دستاورد قابل توجهی، بیهوده مردن. البته مرگ داریا در اثر خودکشی خوب بود، ولی مرگ های دیگه، مثل مرگ ناتالیا، اثر قابل توجهی در داستان نداشت. مقطعی بود. در حالی که مرگ، مخصوصاً مرگ کسی که نسبت بهش ظلم شده، منطقاً باید تأثیر زیادی توی رفتار و افکار شخصیت ظالم داشته باشه.
و...و...و...و
خلاصه این که وقت زیادی روی رمان گذاشتم، ولی چندان لذتی نبردم ازش.
اين رمان يك رمان تلفيقي است ..تم سياسي/اجتماعي وخانوادگي دارد ...اين كتاب درباره زندگي قزاق هاي ساكن كناره رود دن است ..زمان رمان به جنگ جهاني اول وانقلاب اكتبر روسيه برميگردد رمان شخصيت هاي زيادي دارد كه مهمترين شخصيت كتاب گريگور است ...او شخصي شجاع وجنگجو وخستگي ناپذير است ..گريگور عاشق وطنش است اما از تزار متنفر است به همين دليل دچار سردرگمي سياسي ميشود گاهي با بلشويك ها همراه ميشود اما نميتواند همه قوانين بلشويكي را بپذيرد او از عدالت خواهي سوسياليست خوشش مي ايد ولي موافق تقسيم اراضي قزاقها نيست بعد به سمت طرفداران امپراطوري برميگردد...اما همه تجربيات سياسي ونظامي او در برابر عشق سوزان وغم انگيز او رنگ ميبازد ومسير زندگيش به سودايي ديگر كشيده ميشود ..در اين كتاب پر شخصيت نويسنده توانسته به زيبايي هرچه تمامتر واقعيت هاي زندگي مردم طبقه دهقان وكارگر را در جامعه روسيه زمان انقلاب به خوبي به تصوير بكشد ..ترجمه استاد شاملو در باره شعر هاي فولكور قزاق كه معناي لهجه اي ان متفاوت است بسيار عالي ودرست است ...
إنما الأدب الخصب حقًا ، هو الذي يلذّك حين تقرؤه ، لأنه يقدّم إليك ما يُرضي عقلك وشعورك ، ولأنه يوحي إليك ما ليس فيه ، ويلهمك ما لم تشتمل عليه النصوص ، ويعيرك من خصبه خصبًا ، ومن ثروته ثروة ، ومن قوته قوة ، و يُنطقك كما أنطق القدماء ، ولا يستقر في قلبك حتى يتصور في صورة قلبك أو يصور قلبك في صورته ، وإذا أنت تعيده على الناس فتلقيه إليها في شكل جديد يلائم حياتهم التي يحيونها ، وعواطفهم التي تثور في قلوبهم ، و خواطرهم التي تضطرب في عقولهم.
هذا هو الأدب الحي . هذا هو الأدب القادر على البقاء ومناهضة الأيام. فأما ذلك الأدب الذي ينتهي أثره عند قراءته ، فقد تكون له قيمته وقد يكون له غناؤه ، ولكنه أدب موقوت يموت حينينتهي العصر الذي نشأ فيه . ولو أنك نظرت في آداب القدماء والمحدثين لرأيت منهم طائفة لا يمكن أن توصف بأنها آداب عصر من العصور أو بيئة من البيئات أو جيل من الأجيال ، وإنما هي آداب العصور كلها والبيئات كلها والأجيال كلها ، لا لأنها تعجب الناس على اختلاف العصور والبيئات و الأجيال فحسب ، بل لأنها مع ذلك تلهم الناس وتوحي إليهم ، وتجعل منهم الشعراء والكتاب والمتصرفين في ألوان الفن على اختلافها.
لا نعرف شئ عن هذه الرواية إلا أنها كُتبت في اثنا عشر عامًا، واحتوت على ستمئة شخصية خلقها الكاتب ونسجها في لوحة حيّة لا يضاهي جمالها شئ، وتحكم في أقدارها وتصرفاتها بتمكن واحترافية غريبة، تقع في القلب موقع حسنا، أرواح مئات البشر سطرها شولوخوف على أوراقه ونقلها لنا ليترك أثره الخالد، ونعرف حينها سحر الأدب الخالص، يُكتب من القلب ليصل إلى القلب.
الروس وعظمة أدبهم وروعته، سلسلة من الإبداع كل حلقة فيها أقوى وأكثر متانة ، فنتجت لنا تراثهم الخالد.
الدون الهادئ: نهر صغير مليء بالبشر والاحداث، تسبح فهي لتكتشف تيار الحياة الجارف، فيه حروب البشر وبشاعتهم، ولوعة الحب وقلوب البشر الغريبة العميقة، فيها كل شئ، لتنتهي من قرائتها لتعرف حينها أنك قرأت مالم يشبهه شئ في عظمته.
لكأن أيام البحث عن الحقيقة ، و التأرجح ، و التقلب ، و الصراع الداخلي المؤلم لم تكن قط . لقد مرت كما يمر السحاب ، و ها هو سعيه صار يبدو جزافًا لا طائل تحته . ما الذي كان يشغل أفكاره؟ علام تقلبت روحه كالذئب الطريد ، بحثًا عن سبيل للخلاص ، عن حل للتناقضات ؟
لقد بدت الحياة حكيمة و سخيفة معًا في بساطتها . و غدًا يعتقد بأن ليس هناك حقيقة واحدة يستطيع الكل أن يستظلوا تحت جناحها ، وبات يعتقد أن لكل امرئ حياته الخاصة به و سبيله الخاص . فمن أجل كسرة خبز ، أو رقعة أرض ، أو من أجل الحق في الحياة ، كان الناس يحتربون منذ الأبد ، و لسوف يقتتلون منذ أبد الدهر ما دامت الشمس تسطع فوق رؤوسهم ، وما بقي الدم حارًا في عروقهم .ينبغي أن يحارب أولئك الذين يريدون حرمانه من حياته ، من حقه في الحياة ، ان يحاربهم بثبات لا يعرف الكلل ، بسلاح الكراهية البارد . ينبغي الا يكبح مشاعره ، بل يطلق لها كل العنان .
В переломный для России момент в стране происходило многое, о чём Михаил Шолохов предпочёл умолчать. Его простыня о вольной казацкой жизни не выдерживает никакой критики, если вообще стоит рассматривать описываемое автором за отражение будней общества, стоявшего накануне революции. Первый том «Тихого Дона» писался в качестве самостоятельного произведения и имел одну цель — показать переворот в самосознании людей. Только у читателя складывается стойкое ощущение, будто данную идею автору подсказали, поскольку последние страницы резко контрастируют с остальным текстом, не имея никаких предпосылок к финальным суждениям главного действующего лица казака Григория Мелехова.
این رمان را زمانی که ویروس روس خوانی به جانم افتاده بود ، خواندم.حتی یک جمله در این رمان چهار جلدی اضافه نیست . و البته خوشحالم که ترجمه به آذین نصیبم شد نه احمد شاملو که متن انگار تحریف شده است
Прочитала книгу в high school. Якраз в цей час читала всю програмну українську літературу. Зазвичай російська література крутиться навколо життя дворян і про життя «крестьян» я мало чого читала. Ця якраз про життя «звичайних» людей. Українська література навпаки дуже багато має творів про життя «села». Мені було цікаво порівнювати героїв цієї книги з героями книг Панаса Мирного, Кобилянсткої, Нечуй-Левицького. Наскільки це було можливо. Після того як я закінчила цю книжку зрозуміла, що ми різні. Перше, що кинулось в очі культ поваги до старших людей в укр, який був не так сильно виражений в росії. Хоча й Донское козачество має укр коріння. Також мені сподобався стиль письма. Я читала в задоволення. Твір дуже великий і ритм має доволі повідьний. Тим не менш, мені було все одно цікаво і я прочитала швидко. Бо просто письменник гарно пише.
Я читала эту книгу просто в захлеб и часто опаздывала на тренировку. Мне очень нравится это произведение. Это не просто роман, это настоящая история о любви, измене, переменам и принятии реальности.
في عام ١٩٥٦ حازت الرواية على جائزة نوبل للأدب .. قام بكتابتها شولوخوف بعد عودته للدون ..وقد عكف على كتابتها أربعة عشرة عاماً .. بداية من عام ١٩٢٦ .. وتتكون الرواية من أربعة مجلدات .. وعلى إثرها اتهم شيليخوف بقضية انتحال .. وواجه هجوم عنيف من القراء .. حيث كيف تسنى له كتابة مثل هذا العمل الضخم .. الرواية تتكلم عن روسيا خلال الحرب العالمية الأولى وحتى الحروب الأهلية المقامة مابين البلاشفة الحمر ( الشيوعيين ) والبيض الدين هم ضد الحمر .. وبطل الرواية هو غريغوري الذي ينال حصة من العذاب والقمع والتشرد خلال تلك الحروب الطاحنة .. وحنينه إلى أرضه وبيته وأهله .. الرواية رائعة جداً .. تشبه في فكرتها العامة رواية السلم والحرب لتليستوي .. في تصويره الدقيق لرحى الحرب والقتل والنهب في القرى والاعدامات .. وفيها شرح دقيق للدون والقرى المنبسطة على أراضها .. وناسها وحياتهم البسيطة في الزراعة وتربية الماشية ..
Вот не думала я, не гадала, что смогу прочитать 2 книги (1 том) Тихого Дона, мастодонта русской литературы, всего лишь за неделю. Я до жути неусидчивый читатель, поэтому классика даётся мне особо сложно, хоть её я и пылко люблю. Шолохов создал просто непередаваемую атмосферу уюта, тепла и любви. Именно моменты, в котором играет центральную роль мой родной Татарский хутор, стали для меня самыми любимыми. Но роман наполнен и страстями, предательствами и тягостным выбором каждого героя своего желаемого будущего. Очень тяжело запоминать всех героев, особенно на фронте, как тяжело переживать всю горечь, боль и потери войны. Уже взялась за второй том, который надеюсь меня не разочарует. Но уже сейчас я могу сказать, что эта книга во многом изменила моё мировоззрение♥
Продралась через страшные сцены горя, насилия, человеческой тупости. Втянулась, насладилась песнями, языком, Гришка прям как родной стал. А как началась война - книга для меня всё-таки стала другой, не смогла продолжать.