पुस्तक “आलोचना” एवं “आधुनिक भारत”का उद्देश्य समकालीन भारत में आलोचना के बदलते अर्थ का पता लगाना है। अध्याय आलोचना के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं, जिसमें इसकी परिभाषा, इतिहास, समाज में भूमिका और राजनीति, मीडिया, कला और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर इसका प्रभाव शामिल है। यह पुस्तक आलोचना के क्षेत्र में विभिन्न उभरती प्रवृत्तियों और इसकी संभावित भविष्य की दिशा पर भी चर्चा करती है। आलोचना सार्वजनिक चर्चा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और यह समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। भारत में प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक आलोचना के स्वरूप में महत्वपूर्ण परिवर्तन आये हैं। यह पुस्तक प्राचीन भारत, मुगल काल, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल और समकालीन भारê