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Pratinidhi Kavitayen : Kumar Ambuj

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1990 के बाद कुमार अम्बुज की कविता भाषा, शैली और विषय-वस्तु के स्तर पर इतना लंबा डग भरती है कि उसे ‘क्वांटम जम्प’ ही कहा जा सकता है। उनकी कविताओं में इस देश की राजनीति, समाज और उसके करोड़ों मजश्लूम नागरिकों के संकटग्रस्त अस्तित्व की अभिव्यक्ति है। वे सच्चे अर्थों में जनपक्ष, जनवाद और जन-प्रतिबद्धता की रचनाएँ हैं। जनधर्मिता की वेदी पर वे ब्रह्माण्ड और मानव-अस्तित्व के कई अप्रमेय आयामों और शंकाओं की संकीर्ण बलि भी नहीं देतीं। यह वह कविता है जिसका दृष्टि-संपन्न कला-शिल्प हर स्थावर-जंगम को कविता में बदल देने का सामथ्र्य रखता है।कुमार अम्बुज हिन्दी के उन विरले कवियों में से हैं जो स्वयं पर एक वस्तुनिष्ठ संयम और अपनी निर्मिति और अंतिम परिणाम पर एक जिश्म्मेदार गुणवत्ता-दृष्टि रखते हैं।

205 pages, Kindle Edition

Published March 1, 2021

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About the author

Kumar Ambuj

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प्रकाशन : कविता संग्रह—'किवाड़’ (1992), 'क्रूरता’ (1996), 'अनन्तिम’ (1998), 'अतिक्रमण’ (2002) और एक कहानी संग्रह—'इच्छाएँ’ (2008)।

सम्मान : कविताओं के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, श्रीकान्त वर्मा पुरस्कार, गिरिजाकुमार माथुर सम्मान, केदार सम्मान और वागीश्वरी पुरस्कार।

साहित्य अकादमी, राष्ट्रीय नाट्य संस्थान, दूरदर्शन, आकाशवाणी सहित शीर्ष साहित्यिक संस्थाओं में रचनापाठ। विभिन्न प्रतिनिधि समकालीन हिन्दी कविता के संचयनों में कविताएँ शामिल। केरल एस.सी.ई.आर.टी. के एवं अन्य कुछ पाठ्यक्रमों में कविताएँ संकलित। कविताओं के रूसी, जर्मनी, अंग्रेजी, नेपाली सहित अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद। कवि द्वारा भी संसार के कुछ चर्चित कवियों की कविताओं के अनुवाद पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कहानियाँ व्यापक रूप से प्रकाशित।

बैंककर्मियों की साहित्यिक संस्था 'प्राची’ के संस्थापक महासचिव एवं म.प्र. प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल में।

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Profile Image for Ashutosh.
15 reviews
October 6, 2024
पिछले पन्नों की लिखाई धूमिल होती जा रही है
मैं उसको बचाने का कोई भी प्रयास नहीं कर पाता हूं
ठीक उसी तरह जैसे छीण हो रही है
मेरे अंदर की मनुष्यता
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