'सतरंगिनी' में एक गीत है और उनचास कविताएं। इन्हें बच्चनजी ने सात रंगों के शीर्षकों में विभाजित किया है। प्रत्येक रंग की कविताएं अपनी विशिष्टता लिये हुए हैं और इनमें से कई कविताएं आज लोकप्रियता के शिखर पर पहूंच चुकी हैं। बच्चनजी 'सतरंगिनी' की भूमिका में अपने पाठकों से अनुरोध किया है कि वे उनकी मनोभूमि को अच्छी तरह समझने और इन कविताओं का पूरा आê
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हरिवंशराय बच्चन की लिखी अनेकानेक पुस्तकों में सतरंगिनी का मेरे दिल में विशेष स्थान है। स्कूल जीवन में बच्चन जी के व्यक्तित्व के प्रति पहला आकर्षण उनकी कविता जो बीत गई वो बात गई से पैदा हुआ। स्कूल की किताबों में प्रत्येक वर्ष किसी कवि की अमूमन एक ही रचना होती थी। इसलिए हर साल जब नई 'भाषा सरिता' हाथ में होती तो ये जरूर देख लेता था कि इसमें बच्चन और दिनकर की कोई कविता है या नहीं। कॉलेज के ज़माने में बच्चन जी की कविताओं से सामना होता रहा और उनकी लिखी पसंदीदा कविताओं की सूची में जो बीत गई के बाद, नीड़ का निर्माण फिर फिर, अँधेरे का दीपक और नई झनकार शामिल हो गयीं। बाद में पता चला कि ये सारी कविताएँ उनके काव्य संकलन सतरंगिनी का हिस्सा थीं।