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न भूतो न भविष्यति
An award-winning novel based on Swami Vivekananda.
692 pages, Hardcover
First published January 1, 2004
About the author
Narendra Kohli
212 books106 followersPadmashree Narendra Kohli is one of the most eminent and well-known Hindi writers of our times. His novel based on the Ram-Katha, Abhyuday, shifted the course of Hindi novel-writing. Another of his novels, Mahasamar, based on the Pandava-katha went on to become just as popular. His novel-series, Todo Kara Todo is considered the greatest and foremost novel in any language on the life of Swami Vivekananda. Abhigyan, Vasudev, Sharnam, Aatmaswikriti, Varunaputri, Sagar-Manthan, Ahalya etc. are his other well-known works. Apart from the Padmashree, he has also been awarded the Hindi Akademi award; Delhi Salaka Samman; Uttar Pradesh Hindi Sansthaan award; Pandit Deen Dayal Upadhyay Samman, Lucknow; K.K. Birla Foundation award; Vyasa Samman, New Delhi; Madhya Pradesh government and Bhopal’s Maithili Sharan Gupt Rashtriya Samman, among numerous other honours.
डॉ॰ नरेन्द्र कोहली (जन्म ६ जनवरी १९४०, निधन १७ अप्रैल २०२१, चैत्र शुक्ल पंचमी, नवरात्रि) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हैं। उन्होंने साहित्य के सभी प्रमुख विधाओं (यथा उपन्यास, व्यंग्य, नाटक, कहानी) एवं गौण विधाओं (यथा संस्मरण, निबंध, पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई है। उन्होंने शताधिक श्रेष्ठ ग्रंथों का सृजन किया है। हिन्दी साहित्य में 'महाकाव्यात्मक उपन्यास' की विधा को प्रारंभ करने का श्रेय नरेंद्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक सामाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना कोहली की अन्यतम विशेषता है। कोहलीजी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। जनवरी, २०१७ में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
डॉ॰ नरेन्द्र कोहली (जन्म ६ जनवरी १९४०, निधन १७ अप्रैल २०२१, चैत्र शुक्ल पंचमी, नवरात्रि) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हैं। उन्होंने साहित्य के सभी प्रमुख विधाओं (यथा उपन्यास, व्यंग्य, नाटक, कहानी) एवं गौण विधाओं (यथा संस्मरण, निबंध, पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई है। उन्होंने शताधिक श्रेष्ठ ग्रंथों का सृजन किया है। हिन्दी साहित्य में 'महाकाव्यात्मक उपन्यास' की विधा को प्रारंभ करने का श्रेय नरेंद्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक सामाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना कोहली की अन्यतम विशेषता है। कोहलीजी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। जनवरी, २०१७ में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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Community Reviews
Displaying 1 - 10 of 10 reviews
May 3, 2021
यह पुस्तक स्वामी विवेकानंद के जीवन पर उपन्यास है। स्वामी विवेकानद जीवन का सटीक और स्पष्ट भाषा में वर्णन किया गया है। लेखक आपके दिमाग में वास्तविक विवेकानंद विचार और व्यक्तित्व बनाने में सफल हो जाते हैं। जो लोग दर्शनशास्त्र नहीं जानते वे इस पुस्तक के माध्यम से जान सकते हैं। संवाद समृद्ध हैं और ऐसा लगता है जैसे दृश्य हमारी आंखों के सामने खुल रहे हैं। पाठक नरेंद्र के विचारों को महसूस कर सकते हैं, और नरेंद्र कैसे महान स्वामी विवेकानंद बने। यह हमें बंगाल से लेकर राजपुताना तक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक के समकालीन भारतीय समाज की विशद तस्वीर भी देता है। वे अपने कर्म बंधन में बंधकर नहीं, संसार को एक संदेश देने आए थे। स्वामी विवेकानंद उन सबसे में बिरले हैं।स्वामी जी स्वयंसिद्ध हैं। यह उन्होंने अपने जीवन में ही साबित कर दिया था। सदी के सर्वाधिक विख्यात संन्यासी योद्धा की यह कथा निस्संदेह हर किसी के लिए प्रेरणादायक है| नरेंद्र कोहली ने एक उत्कृष्ट कृति लिखी है।
May 22, 2021
अद्भुत
यह बहुत ही रोचक तरीके से लिखा हुआ अद्भुत ग्रंथ है। विवेकानंद को समझने के लिए बहुत ही अच्छा साहित्य है। ऐसा लगा जैसे में उस जीवन को जी रहा होऊं।
यह बहुत ही रोचक तरीके से लिखा हुआ अद्भुत ग्रंथ है। विवेकानंद को समझने के लिए बहुत ही अच्छा साहित्य है। ऐसा लगा जैसे में उस जीवन को जी रहा होऊं।
May 14, 2021
अप्रतिम
अपने शीर्षक को पूर्ण रूप से सार्थक करती हुई एक पुस्तक। सच में धन्य है स्वामी विवेकानंद जी जैसा महान व्यक्त्तिव । अपनी सनातनी संस्कृति को कोटि कोटि नमन।
अपने शीर्षक को पूर्ण रूप से सार्थक करती हुई एक पुस्तक। सच में धन्य है स्वामी विवेकानंद जी जैसा महान व्यक्त्तिव । अपनी सनातनी संस्कृति को कोटि कोटि नमन।
January 22, 2020
I have been trying to read Swami Vivekananda's story from every point of view available.
This is definitely a great composition by Mr. Kohli and it gives great insight into Swami Ji's internal state of mind.
This is definitely a great composition by Mr. Kohli and it gives great insight into Swami Ji's internal state of mind.
May 15, 2020
The book is narrated very well. 👍
August 15, 2020
I am in love with the way that Narendra Kohli writes about the characters. You can very easily relate with the character and live the novel.
June 28, 2017
अबतक कि सर्वश्रेष्ठ जीवनी स्वामीजी पर,कोहली जी की लेखनी मे ही ऐसा जादू है कि वो आपको बांधे रखता है और आपको ऐसा अनुभव देता है कि आप उस कहानी के साक्षात गवाह हैं ,कुल मिलाकर आप विवेकानंद के साथ एक जीवन जी लेंगे पता और आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप पुस्तक पढ रहे हैं धन्यवाद
Read
June 3, 2021बेहद शानदार
January 12, 2022
This is a great introduction to Vivekananda's life for Hindi readers. I particularly liked the first half, which like all good novels, is a page-turner that nonetheless contains immense wisdom. However, this got a little tedious and repetitive towards the end, only covered his life up to 1894, and also potentially caricatured opponents of Vivekananda. I would still recommend this though.
January 20, 2022
अद्भुत व्यक्ति का अद्भुत वर्णन।
इसके आगे भी और कुछ लिखा जाना चाहिये...
इसके आगे भी और कुछ लिखा जाना चाहिये...
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