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Asylum : Sab Marenge | असायलम : सब मरेंगे

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1970 में डॉक्टर निर्मल बनर्जी ने प्रोफेसर भास्कर के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया प्रोग्राम पर काम किया था, जिसमें भारत के साथ-साथ रोमानिया और हॉलैंड जैसे देश भी शामिल थे। उन दोनों का यह खतरनाक प्रयोग बुरी तरह असफल रहा गया था जिसका नतीजा यह हुआ कि इस प्रयोग में शामिल तीनों ही देश के कुल 90 बहादुर लोग न सिर्फ पागल हो गए, बल्कि उनकी जिंदगी भी खतरे में पड़ गई। उन सबको मजबूरी वश आजीवन मेन्टल असाइलम में ठूंस दिया गया।

वह प्रयोग क्या था? किस कारण वह प्रयोग असफल हो गया? मेन्टल असाइलम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन पागल हुए लोगों की पीछे की क्या कहानी है?

डॉक्टर सत्यजीत बनर्जी, जिसके पिता का इस प्रयोग में एक अहम किरदार था, वह किस तरह इन रहस्यों से पर्दा उठायेगा? भारत, हॉलैंड और रोमानिया के असाइलम

137 pages, Kindle Edition

Published December 22, 2022

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Mithilesh Gupta

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Profile Image for Nikhil Talwar.
223 reviews7 followers
December 18, 2023
यह कहानी एक असायलम की है जिसके राज को सुलझाने के लिए डॉक्टर बनर्जी कुछ ऐसे कार्य करते हैं जो बेहद घातक और नियमों के विरुद्ध होती है!

डॉक्टर बनर्जी के अथक प्रयास द्वारा असायलम के आखिरी दिनों का ब्यौरा जब सामने निकल कर आता है तो उनकी दखलअंदाजगी की वजह से कई लोगों पर जानलेवा साबित होती है! शानदार कहानी को लाजवाब तरीके से लिखा गया है, इसे विस्तार से जानने के लिए तो पूरी किताब पढ़ कर ही आनंद लिया जा सकता है!

यह किताब 2 लेखकों द्वारा लिखी गयी है। कहानी अच्छी है। अगर मरीजों को अपनी मौत मरना था तो उनकी गर्दन धड़ से अलग कैसे हो जाती थी? यह बिल्कुल नहीं बताया। सोल्जर में अल्फा सीरम डाला तो वह वायरस से कैसे इन्फेक्टेड हो गए?

अगर अल्फा सीरम के साथ बीटा और गामा वाले भी मर रहे थे तो डॉक्टर मार्क और अवस्थी एकदम से और अकेले क्यो मर गए? सभी पागल यह क्यो चिल्लाते थे कि वह आ रहा है और किसी को नहीं छोड़ेगा? जबकि अल्फा तो लेखक के अनुसार स्वाभाविक मर रहे थे? और यह यू एन ओ की परमिशन की क्यो और किस नियम के तहत मंजूरी जरूरी थी यह तो लेखक ही जाने क्योंकि ऐसा कोई नियम फिलहाल तो मौजूद नहीं है।

इस उपन्यास का विषय बहुत ही आकर्षक और रोचक है लेकिन जिस तरीके का थ्रील और रोमांच प्रतीत होना चाहिए था, उसको लेखक ढंग से पेश नहीं कर पाए, क्लाइंमैक्स के साथ न्याय नहीं हो पाया. किताब का शीर्षक अपने में नयापन लिए अनोखा है। कवर पेज बेहद आकर्षक है।
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