अपराजिता भी आम लड़कियों के जैसे संवेदनशील है, भावुक है, गुस्सैल है, रोने वाली है, परिस्थिति के अनुरूप अपने को ढालने वाली है l लेकिन कहते हैं कि लड़की अपनी बेइज्जती बर्दास्त कर जाती है, लेकिन बात जब अपनों पर आती है तो वह धृति बन जाती है, कहानी में आप जब पढ़ेंगे तो देखेंगे कि वह चाहती तो कुछ शब्दों को छिपा जाती, एक आदर्श बहु के रूप में बनी रहती लेकिन ज्योति के साथ हुआ बर्ताव उसे विद्रोह करने पर मजबूर कर देता है l इस विद्रोह ने उसे नायिका से विरह की अग्नि में झूलसती एक आम पत्नी बना देती है l वह विरह की वेदना झेल नहीं पाती, टूट के बिखर जाती और झुकने को राजी हो जाती है l