ये कविताएँ उनके लिए हैं जो नाग कीलते हैं। ,अज्ञेय (साँप! तुम सभ्य तो हुए नहीं) से लेकर मुक्तिबोध (मेहतर चाहिए) तक की कविताई को पचा गए कवि लव अपनी इन कुछ ताजातरीन कविताओं में मणिपुर से लेकर जंतर-मंतर पर बैठे पहलवानों तक की पीड़ा को बड़ी तल्खी से पेश करते हैं।