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Jitni Mitti Utna Sona | जितनी मिट्टी उतना सोना

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कुमाऊँ, उत्तराखंड के सुदूर हिमालयी इलाक़े में भारत-तिब्बत सीमा से लगी व्यांस, दारमा और चौंदास घाटियों में निवास करने वाले लोग सदियों से तिब्बत के साथ व्यापार करते आए हैं। अपने आप को रं कहने वाले ये जन अद्वितीय सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से लैस एक अनूठी सभ्यता के ध्वजवाहक हैं।

यह यात्रावृत्त इन्हीं घाटियों में की गई अनेक लंबी शोध-यात्राओं का परिणाम है। यह आपका परिचय संसार के एक ऐसे रहस्यमय हिस्से से करवाएगा जिसके बारे में बहुत कम प्रामाणिक कार्य हुआ है।

इस किताब में आपको बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हिमालय की गोद में निवास करने वाले रं समाज की सांस्कृतिक संपन्नता के दर्शन तो होंगे ही, आप उस अजेय जिजीविषा और अतिमानवीय साहस से भी रू-ब-रू होंगे जिसके बिना इन दुर्गम घाटियों में जीने की कल्पना तक नहीं की जा सकती।

मानवशास्त्रीय महत्त्व के विवरणों से भरपूर इस यात्रावृत्त में कथा, गल्प, कविता, लोक साहित्य, और स्मृति के ताने-बाने से एक तिलिस्म रचा गया है जिसमें बुज़ुर्गों के सुनाए क़िस्सों की परिचित ऊष्मा भी है और अजनाने भूगोल में यात्रा करने का रोमांच भी।

208 pages, Paperback

Published November 28, 2022

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About the author

Ashok Pande

6 books6 followers

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Displaying 1 - 5 of 5 reviews
Profile Image for Ashish Kumar.
104 reviews5 followers
December 23, 2023
इस किताब को पढ़ते वक़्त लग रहा था कि रं कितने प्यारे होते होंगे जिनसे मेरा राबता नहीं हुआ अभी तक।ऐसा लग रहा था किताब पढ़ते वक्त जैसे शब्द ही प्रकृति और इंसानों के इतना क़रीब ले जा रही है।कई जगह ऐसा लगा जैसे साफ़ संस्कृति ,व्यवहार, संस्कार,लोककथाएँ और लोगों का ख़ूबसूरत साथ पहाड़ियों के उचाईं से बिल्कुल पानी की धारा की तरह दिमाग़ और दिल में उतर रही हो।

अनुभव का एहसास है। एक तरह से लगता है लोककथाओं का ये एक बेहतरीन दस्तावेज भी है जिसके ज़रिए अगले कई साल के बाद भी लोग आसानी से धारचूला,तवाघाट,व्याँस,दारमा और चौंदास घाटी के ऐस पास के कई गाँव को शब्दों के मार्फ़त वहाँ की ज़िंदगी का एहसास कर पायेंगे।

1950 के दशक में तिब्बत पर चिन के क़ब्ज़े से पहले लोग हर साल जाया करते थे और व्यापार करते थे। कई लोकगाथाओं का ज़िक्र है इस किताब में कुछ के सिरे लेखक को ख़ुद खुले हुए मिलते है। कई कथायें प्रकृति के क़रीब होती है तो कई कैरेक्टर के क़रीब लेकिन इन सब कथाओं की सुंदरता को बखूबी लेखक ने लिखा है। कैरेक्टर भी कमाल के है पूरी यात्रा के दौरान। पूरी किताब एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म के शक्ल में नज़र आती है।

कुछ यात्राएँ आपके अंदर ठहर जाती है जिसका सफ़र रूहानी हो जाता है।

पढ़िए समय निकाल कर 📖👏🏻
Profile Image for Anveshak.
83 reviews3 followers
January 13, 2024
जब आप स्वयं सक्षम नहीं होते हैं तो ऐसी किताबें यात्रा करवा देती हैं उन जगहों की जहां आप जा नहीं पाए। साथ ही वे रस्ते जीवित हो उठते हैं जिन से आप कभी गुजरे हों। रं संस्कृति के साथ घूमते फिरते मंडणी के रास्तों और पलसियों(बकरी चरवाहों) के साथ पुनः घूम आया और नंदी कुंड के ऊपर बर्फ से ढके घिया विनायक पास को भी फिर से पास कर लिया।
शुक्रिया इन नई पुरानी यात्राओं के लिए।
Profile Image for Potatojaisiladki.
7 reviews
October 2, 2024
Reading this book was like embarking on a journey to a distant land, one that I may never physically traverse but have experienced deeply through its pages. The story swept me away into a world where simplicity reigns and innocence is at the heart of its people. It gave me a glimpse into a tribe whose values and way of life are pure and unpretentious, painting a picture of humanity at its most authentic.

It opened a window for me to explore my own roots, to look at my people and their way of life with renewed curiosity and appreciation. The kindness and sincerity of the characters in the book reminded me that there is beauty in simplicity, and that so many truths about life are to be found in the traditions and cultures we might take for granted.
21 reviews
October 8, 2025
ये पुस्तक यात्रा संस्मरण को इस तरीके से बयां करता है कि लगता है आप भी इसका हिस्सा बन गए हैं। मुख्यधारा से अलग एक प्राकृतिक क्षेत्र में जहां लोग अभी भी अपने जीने के लिए सरकारी और आधुनिक व्यवस्थाओं से दूर प्रकृति प्रदत्त चीजों के ऊपर निर्भर है और खुश रहते हैं में की गई यात्रा के माध्यम से लेखक हिंदुस्तान के तमाम उन जगहों और वहा के लोगों के विषय में सोचने को प्रेरित करते हैं जो देश की मुख्य धारा से नहीं जुड़े हैं, और जहां लोगो को छोटी से छोटी सुविधाओं के लिए (जो शहरों में आसानी से उपलब्ध है) कितना संघर्ष करना पड़ता होगा।
Profile Image for Neeraj Kumar.
Author 10 books
August 27, 2024
An interesting read on lives and culture of people living in mountains.
Displaying 1 - 5 of 5 reviews

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