मेरे पिछले उपन्यास “माया-जाल” के बारे में पाठकों की जो प्रतिक्रियाएं मुझे मिल रही है, वो मुझे बहुत उत्साहित और गदगद करने वाली है। रहस्य और रोमांच से भरी “माया-जाल” की कहानी मेरे सभी पाठकों को बहुत पसंद आई है और आंकड़े भी इस बात के गवाह है।
पाठकों का यही प्यार मुझे हमेशा मुझे कुछ नया लिखने की प्रेरणा देता है और उसी का नतीजा है मेरा प्रस्तुत उपन्यास “खिलाड़ी” जो मेरी 34 वीं रचना है। मुझे इस बात का पूरा यकीन है कि “खिलाड़ी” आप लोगों को “माया-जाल” से भी ज्यादा पसंद आएगा।
ये कहानी मुख्य रूप से कानूनी दाँव पेंच पर आधारित है और मेरा दावा है कि जैसे जैसे आप इस कहानी को पढ़ते जाएंगे, इस के मुख्य पात्र क्रिमिनल लॉयर जयवर्धन हेगड़े के तेज दिमाग के कायल होते जाएंगे।