जीवन में अधिकांशतः हम सुनियोजित ढंग से चलना चाहते हैं। अपनी सभी यात्राओं से पूर्व उचित प्रबंध करते हैं। पर कभी कभी परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर होतीं हैं। और हमारी सुखद यात्रा एक कठिन अनुभव में बदल जाती है। हमारी जान तक जोखिम में पड़ जाती है। हमारे मस्तिष्क की प्रवृत्ति ऐसी है कि कठिन एवं कटु अनुभव हमारे मानस पटल पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। और जीवन की कभी न भुलाने वाली स्मृति बन जाते हैं। ऐसे ही एक खतरनाक अनुभव से हम गुजरे जब हमने उत्तराखंड के एक पहाड़ पर ट्रैकिंग करने की योजना बनाई और हमें जंगल में ही रात हो गई।